नागौर
पिछले साल शुरू हुआ हिन्दुस्तान का सबसे चर्चित म्यूजिक रियलिटी शो ‘इंडियन आइडल-12’ सीजन के नतीजे 4 दिन पहले रविवार रात 12 बजे आ गए। इसके विनर पवनदीप राजन बने। अरुणिता फर्स्ट रनर अप और सायली शो में सेकेंड रनरअप रहीं। इससे पहले फिनाले में शो के टॉप 8 में शामिल रहे सिंगर राजस्थान के सवाई भाट ने जमकर अपनी आवाज का जादू बिखेरा। उन्होंने कई धमाकेदार परफॉर्मेंस दीं, लेकिन इसमें से कुछ फिनाले परफॉर्मेंस एपिसोड में लाइव टेलीकास्ट नहीं हो पाई थीं।

इंडियन आइडल-12 फिनाले में सवाई ने दी थी एक से बढ़कर एक परफॉर्मेंस।
फिनाले के 3 दिन बाद बुधवार को शो के जज और मशहूर सिंगर, म्यूजिक डायरेक्टर व एक्टर हिमेश रेशमिया ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर सवाई की ऐसी ही एक परफॉर्मेंस का वीडियो शेयर कर लिखा- ‘सवाई भाट ने इंडियन आइडल-12’ सीजन के फिनाले में मेरे द्वारा लिखे गए ब्लॉकबस्टर हिट सांग ‘सांसें’ गाकर धूम मचा दी। सवाई यू रॉक।

हिमेश रेशमिया ने सोशल मीडिया पर की पोस्ट।
इसके आगे उन्होंने लिखा ‘सवाई के गाए गए हिमेश रेशमिया मेलोडीज के तहत ‘हिमेश दिल से’ म्यूजिक एलबम के पहले सॉन्ग ‘जब तक सांसें चलेंगी तुझको चाहूंगा यार, मर भी गया तो भी तुझे करूंगा में प्यार…’ को अब तक यू-ट्यूब पर 50 मिलियन से ज्यादा लोग सुन चुके हैं।
12 घंटों तक लगातार चले फिनाले एपिसोड में ये परफॉर्मेंस लाइव टेलीकास्ट नहीं हो पाई थी। अब हिमेश रेशमिया द्वारा इसे सोशल मीडिया पर शेयर किए जाने के बाद सवाई के फेन्स बेहद खुश हैं।
इससे पहले ग्रैंड फिनाले में सवाई के फैंस ने उन्हें परफॉर्म करते हुए देखा था। शो के लाइव टेलीकास्ट में सवाई ने मशहूर सिंगर और शो की जज सोनू कक्कड़ के साथ कच्चे धागे, बॉलीवुड फिल्म के हिट सॉन्ग ‘तेरे बिन नहीं जीना’ की धमाकेदार परफॉर्मेंस दी थी। इसके अलावा सिंगर सवाई भाट ने पिछले विनर रहे सलमान अली और सनी हिन्दुस्तानी के साथ भी धमाल मचाया था।

फिनाले एपिसोड में सवाई ने शो की जज सोनू कक्कड़ के साथ भी परफॉर्मेंस दी थी।
संघर्षों भरा रहा है सवाई का सफर
गायकी से लाखों लोगों को अपना दीवाना बना चुके सवाई के जीवन की अब तक की कहानी संघर्षों से भरी रही है। सवाई भाट राजस्थान के नागौर जिले के गच्छीपुरा गांव के रहने वाले हैं। शो में जाने से पहले तक 20 साल के सवाई भाट को अपना और अपने परिवार का पेट पालने के लिए गांव-गांव कठपुतली का खेल दिखाना व देशी-विदेशी पर्यटकों के सामने गाने-बजाने का काम करना पड़ रहा था।

सवाई गांव-गांव घूमकर कठपुतली का खेल भी दिखाते थे।
सवाई बहुत छोटी उम्र में ही अपने दादा खैराती भाट व पिता रमेश भाट के साथ कठपुतली का खेल दिखाने के दौरान गांव-गांव घूमते थे। गांव के स्कूल से तीसरी कक्षा तक पढ़ाई पूरी करने के बाद वो अपने पिता के साथ जोधपुर चले गए। उन्होंने गांव-गांव घूमकर कठपुतली का खेल दिखाकर अपने पिता रमेश व मां सुशीला का घर चलाने में साथ दिया। उन्होंने बताया कि कठपुतली का खेल दिखाने के दौरान ढोलक व हारमोनियम बजाना सीख गए। वो शादी-ब्याह की महफिलों, आस-पड़ोस में होने वाले माता के जगरातों व भजन संध्या तक में हारमोनियम और तबला बजाने लगे। मांगणियार और लंगा गायकों के साथ गाने-बजाने का काम भी किया।