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3 दिन में सरकार गिराना चाहती थी भंवरी:मंत्री और विधायक समेत 17 लोग किडनैप व मर्डर के आरोप में जेल पहुंचे, किसी ने मारा तो किसी ने जलाया, 10 साल बाद 16 को जमानत

जोधपुर

एक दशक पहले का भंवरी प्रकरण आज एक बार फिर से सुर्खियों में है। भंवरी अपहरण व हत्या के मामले में 10 साल से बंद आरोपी जमानत पर बाहर आ चुके हैं। विधायक और मंत्री समेत 17 लोग साजिश के आरोप में जेल में थे। अब धीरे-धीरे कर इनके बाहर आने का सिलसिला शुरू हुआ। इनमें से 16 आरोपियों को जमानत मिल चुकी है। अब केवल इंद्रा विश्नोई ही जेल में है। मंगलवार को भंवरी के पति अमरचंद व पूर्व मंत्री महिपाल मदेरणा समेत 7 लोगों को जमानत मिल चुकी है।

10 साल पहले सामने आया यह प्रकरण प्रदेश की राजनीति में भूचाल लाने वाला सबसे बड़ा मामला था। एक साधारण परिवार से ताल्लुक रखने वाली भंवरी की महत्वाकांक्षा ने उसे इतना आगे बढ़ा दिया कि वह तीन दिन में सरकार गिराने का दावा करने लग गई थी। शुरुआत उसकी नौकरी के सस्पेंशन से हुई थी। भंवरी राजस्थानी फिल्मों में अपना नाम करना चाहती थी, इसलिए ड्यूटी छोड़ शूटिंग पर जाती थी। यही कारण था कि उसे सस्पेंड कर दिया गया, लेकिन स्थानीय विधायक मलखान व मंत्री महिपाल मदेरणा की मदद से उसके निलंबन को रद्द करवा लिया। फिर इन तीनों के बीच शुरू हुई नजदीकियां। भंवरी को ग्लैमर से ज्यादा अब राजनीति का नशा चढ़ने लगा था। यहां तक कि वह चुनाव लड़ने के लिए टिकट मांगने लगी थी। मुश्किलें बढ़ती देख दोनों नेताओं ने उससे दूरी बना ली। इस बीच एक सीडी ने पूरे प्रदेश की राजनीति में खलबली मचा दी। यही वो सेक्स सीडी थी, इसी के दम पर भंवरी देवी यह दावा करती थी कि वह तीन दिन में सरकार गिरा देगी। सरकार तो नहीं गिरी, लेकिन मलखान व महिपाल से उसकी दुश्मनी बढ़ गई। फिर रची गई उसके अपहरण व हत्या की साजिश और 2011 में उसका अपहरण कर हत्या कर दी गई।

भंवरी देवी।

भंवरी देवी।

भंवरी प्रकरण के मुख्य आरोपी, जिन पर लगे आरोप
अपहरण व हत्या की साजिश: सीडी कांड के बाद महिपाल मदेरणा, मलखान सिंह, परसराम विश्नोई, इंद्रा विश्नोई, भंवरी के पति अमरचंद, सोहनलाल, कुंभाराम, शहाबुद्दीन ने अपहरण व हत्या की साजिश रची। इसका मुख्य सूत्रधार सहीराम था। उमेशाराम ने सहीराम का सहयोग किया था।
लाश ठिकाने लगाने के लिए: विश्नाराम, कैलाश जाखड़, अशोक, ओमप्रकाश ने मिलकर भंवरी के शव को जलाया और उसकी राख को नहर में बहा दिया था।
पैसों का लेनदेन: दिनेश और पुखराज की पैसों के लेनदेन में भूमिका सामने आई। एक आरोपी रेशमाराम भी था, जो इंद्रा का सहयोगी था। उसे पूर्व में जमानत मिल चुकी थी।
(यह सभी अब जेल से बाहर आ चुके हैं। जेल में इंद्रा ही बंद है)

इंद्रा विश्नोई।

इंद्रा विश्नोई।

CBI के अनुसार यह हुआ था उस दिन
बोरुंदा निवासी ANM भंवरी देवी 1 सितंबर 2011 को दोपहर 1 बजे फिर कभी न लौटने के लिए अपने घर से रवाना होती है। उसने एक कार का सौदा सोहनलाल विश्नोई के साथ किया था। उसके पैसे लेने के लिए भंवरी घर से निकली। चार बजे सोहनलाल ने उसे अपनी गाड़ी में बैठा लिया। सोहन ने उसे आश्वासन दिया कि महिपाल मदेरणा के साथ की उसकी सीडी व कार के पैसे कोई राजू भाई लेकर आ रहा है, जबकि राजूभाई का इससे कोई लेना-देना तक नहीं था।

सोहनलाल लगातार उसे कार में एक से दूसरे स्थान पर घुमाता रहा। शाम होने लगी तो भंवरी की बेसब्री भी बढ़ गई। इस बीच सोहन जयपुर में महिपाल के मकान के आसपास मंडरा रहे सहीराम व उमेशाराम से बात करता रहा। सहीराम ने भंवरी को ठिकाने लगाने की जिम्मेदारी विशनाराम विश्नोई व उसकी गैंग को सौंप रखी थी। सोहन के साथ कार में शहाबुद्दीन व कुंभाराम उर्फ बलदेव भी मौजूद थे। इनका कार्य भंवरी को विशनाराम को सौंपना था। विशनाराम शहाबुद्दीन के कार में मौजूद रहने के दौरान भंवरी को लेना नहीं चाहता था। विशनाराम को राजी करने में समय निकलता चला गया। इस दौरान भंवरी के जोर देने पर ये लोग बोरुंदा रवाना हो गए।

सफेद ड्रेस में विशनाराम और जींस पहना कैलाश जाखड़।

सफेद ड्रेस में विशनाराम और जींस पहना कैलाश जाखड़।

और मर गई भंवरी
बोरुंदा पहुंचने से पहले विशनाराम भंवरी को ले जाने को तैयार हो गया। उसी समय गाड़ी चला रहे बलदेव ने गाड़ी को वापस घुमा दिया। गाड़ी घुमाते ही भंवरी को शक हो गया और उसने चलती गाड़ी का दरवाजा खोल नीचे कूदने की कोशिश की, लेकिन सोहन व शहाबुद्दीन ने मिलकर उसे आगे की सीट की तरफ खींचा। दोनों ने मिलकर भंवरी का सिर व गर्दन जोर से सीटों के बीच में दबा दिया। भंवरी के मरते ही गाड़ी में सवार तीनों के हाथ पांव फूल गए। ये लोग थोड़ी देर में जालोड़ा क्षेत्र में पहंचे और विशनाराम से मिले।

भंवरी को मरा देख विशनाराम ने डेड बॉडी लेने से मना कर दिया। उसने कहा कि बात तो जिंदा भंवरी की हुई थी। इस दौरान सहीराम ने अपने फोन से ही महिपाल मदेरणा की विशनाराम से बात कराई। महिपाल ने गिड़गिड़ाते हुए विशनाराम से मदद मांगी और हर संभव सहयोग का भरोसा दिलाया। ऐसे में रात 9 बजे विशनाराम ने भंवरी के शव को अपनी गाड़ी में रखवाया। इस दौरान उसके साथ अशोक, कैलाश व ओमप्रकाश भी थे।

ऐसे खुली पोल
मामले की जांच हाथ में लेने के बाद CBI ने नहर की तलाशी करवाई। कई लोगों की मदद के बाद आखिरकार CBI को भंवरी की अस्थियां विसर्जित करने वाला बोरा एक जगह अटका हुआ मिल गया। इसमें कुछ ही अस्थियां बची थीं। इन अस्थियों की जांच के लिए CBI ने भंवरी के बेटे व बेटी के DNA के साथ अमेरिका में FBI के पास भेजा। FBI ने जांच के बाद पुष्टि कर दी कि ये अस्थियां भंवरी की ही हैं। स्पष्ट हो गया कि भंवरी अब जिंदा नहीं है। यही कारण है कि कोर्ट ने FBI की विशेषज्ञ अम्बर बी कार को तलब कर रखा है, लेकिन वह अपने बयान दर्ज करवाने भारत आ नहीं पा रही है।

भंवरी देवी व महिपाल मदेरणा।

भंवरी देवी व महिपाल मदेरणा।

कड़ियां जुड़ती गईं और खुल गया राज
CBI ने कड़ी से कड़ी जोड़ते हुए जांच शुरू की। जांच में कई नाम सामने आए, लेकिन उन्होंने चुनिंदा लोगों पर ही ध्यान केंद्रित किया। आखिरकार एक के बाद एक कर सहीराम, उमेशाराम, तत्कालीन कैबिनेट मंत्री महिपाल मदेरणा, विशनाराम, सोहनलाल, तत्कालीन विधायक मलखान सिंह विश्नोई, उसका भाई परसराम और यहां तक कि इस साजिश में शामिल भंवरी का पति अमरचंद सहित कुल सत्रह लोगों को CBI ने गिरफ्तार किया। सबसे अंत में मलखान की बहन इंद्रा विश्नोई पुलिस की गिरफ्त में आई। इन लोगों के 164 में दिए गए बयान के आधार पर CBI ने कोर्ट में चार्जशीट पेश की। तब से लेकर यह मामला कोर्ट में लंबित है।

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