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अब RAS में 7वीं रैंक, मां सिलाई मशीन से खर्च चलाती थी, एक-एककर चढ़ी सफलता की सभी सीढ़ियां

अलवर

राजस्थान लोक सेवा आयोग आरएएस परीक्षा में टॉप 10 में आने वाले अलवर के लक्ष्मणगढ़ के मौजपुर गांव निवासी रवि गोयल 12वीं कक्षा तक परचून की दुकान पर सामान बेचते थे। उस समय मां सिलाई मशीन चलाकर घर खर्च में पिता की मदद करती थी। ग्रेजुएशन तक आते-आते बड़ी बहनों ने पढ़ाई में रवि की मदद की। फिर जेआरएफ में सलेक्शन होने के बाद 8 घंटे ड्यूटी कर पढ़ाई का खर्च निकाला। इस तरह गांव के रवि ने सीढ़ी दर सीढ़ी आरएएस के तीसरे चांस में 7वीं रैंक तक पहुंच सफलता हासिल की है।

10वीं में 67 प्रतिशत अंक
रवि गोयल जैसे-जैसे हायर एजुकेशन की ओर बढ़े। वैसे-वैसे उनकी रैंक सुधरती गई। 10वीं कक्षा में केवल 67 प्रतशित अंक थे। 12वीं में 70 प्रतिशत मार्क्स आए, लेकिन ग्रेजुएशन, पोस्ट ग्रेजुएशन के बाद आगे जेआरएफ, नेट, गेट, एसआरएफ में उनकी रैंक अव्वल आई। जिससे उनका आत्मविश्वास बढ़ता ही गया। आरएएस 2013 के एग्जाम में 870वीं रैंक, इसके बाद 95 वीं रैंक आ गई। तब उनको लगा था कि सामान्य वर्ग में 95वीं रैंक अच्छी है। लेकिन उनके जहन में जिद थी कि आरएएस की डबल डिजिट रैंक को सिंगल डिजिट लेकर आना है।

मां-पिता के साथ रवि।

मां-पिता के साथ रवि।

मां को याद करना नहीं भूलते
रवि गोयल बोले मां ने घर में रहकर खूब संघर्ष किया है। बीमार रहते हुए भी सिलाई मशीन चला परिवार का खर्च निकालने में मदद की है। यह सब हमेशा मन में रहता है। इसलिए कहता हूं बड़े बूढ़ों का आशीर्वाद सबसे बड़ा होता है।
पिता आज भी सप्लायर
रवि के पिता पहले बारा भड़कोलल गांव में परचून की दुकान चलाते थे। बाद में गांव मौजपुर में दुकान थी। इसके बाद दादा के पैतृक घर अलवर शहर के स्कीम दो में आकर रहने लग गए। यहां आने के बाद भी पिता परचून की दुकानों पर छोटा-मोटा सामान सप्लाई कर परिवार चलाते रहे हैं। रवि की दो बड़ी बहन टीचर हैं। छोटा भाई अपना बिजनेस करने लगा है।

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