मंगल ग्रह जैसी परिस्थितियों में एक साल तक रहने की इच्छा रखने वाले लोगों से अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा ने आवेदन मांगे हैं। 4 लोगों को मंगल जैसे ग्रह पर रहने का मौका मिलेगा। नासा का कहना है कि वो मंगल ग्रह पर सामने आने वाली चुनौतियों से निपटने के लिए एक स्टडी करना चाहता है। सभी यात्रियों को जिस मंगल की तरह दिखने वाली परिस्थिति में रखा जाएगा, उसे ह्यूस्टन में बने जॉनसन स्पेस सेंटर में तैयार किया गया है। जानिए, यह जगह कैसी है और यहां लोगों को क्या-क्या चुनौतियां मिलेंगीं…
1700 वर्ग फीट में बने मार्स ड्यून अल्फा में रहेंगे लोग
चुने जाने वाले चारों लोग ह्यूस्टन में बने जॉनसन स्पेस सेंटर में रहेंगे। यहां 3डी प्रिंटर से मार्स ड्यून अल्फा बनाया गया है जो 1,700 वर्ग फीट में फैला है। नासा के मुताबिक, पृथ्वी पर बने इस सेंटर में रहने से लोगों को उन शारीरिक और मानसिक चुनौतियों को समझने और उनका मुकाबला करने में मदद मिलेगी, जिनका अंतरिक्ष यात्री सामना करते हैं।

1,700 वर्ग फीट में फैला मार्स ड्यून अल्फा, यहीं पर चुने गए यात्रियों को रखा जाएगा।
इन चुनौतियों का करना पड़ेगा सामना
मंगल ग्रह की तरह तैयार किए गए मार्स ड्यून अल्फा में यात्रियों को कई तरह की चुनौतियां मिलेंगी। जैसे- यहां सुविधाएं सीमित होंगी, किसी से बात करने के लिए कम्युनिकेशन देरी से होगा। इसके अलावा यहां मौजूद उपकरण के फेल होने जैसी चुनौतियों से भी जूझना पड़ सकता है। इससे समझा जा सकेगा कि अंतरिक्ष यात्रियों को मंगल मिशन पर किस तरह की शारीरिक और मानसिक चुनौतियों से जूझना पड़ सकता है। यहां मिलने वाला खाना भी रेडी-टू-ईट होगा, ठीक वैसा ही, जैसा अंतरिक्ष यात्री खाते हैं।
आवेदन करने के लिए 3 बड़ी शर्तें
- 30 से 35 साल के नॉन-स्मोकर अमेरिकी नागरिक इसके लिए आवेदन कर सकते हैं।
- आवेदक को अंग्रेजी में फ्लुएंसी के साथ फिजिकल फिट होना भी जरूरी है।
- मान्यता प्राप्त संस्थान से इंजीनियरिंग, मैथ्स, फिजिक्स या कम्प्यूटर साइंस में मास्टर डिग्री होना अनिवार्य है।