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एल्गार परिषद केस में NIA की रिपोर्ट:आरोपी देश के खिलाफ युद्ध छेड़ना चाहते थे, JNU और TISS के स्टूडेंट्स को आतंक फैलाने के लिए भर्ती किया

मुंबई

एल्गार परिषद केस में गिरफ्तार 15 लोगों के खिलाफ 16 अपराधों के तहत केस दर्ज करने का प्रस्ताव दिया है। इसमें देश के खिलाफ युद्ध छेड़ने का आरोप तो है, लेकिन प्रधानमंत्री की हत्या की साजिश का जिक्र नहीं है। जबकि, पुणे पुलिस ने अपने ड्राफ्ट चार्ज में कहा था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हत्या करने के लिए हथियार जुटाए गए थे।

इस महीने की शुरुआत में NIA ने स्पेशल कोर्ट को ड्राफ्ट चार्ज की कॉपी सौंपी है। इसमें विदेशों से हथियार और गोला बारूद लाने की कोशिश का जिक्र है, जिसका दावा पुणे पुलिस ने भी किया था। NIA अधिकारी ने बताया कि ड्राफ्ट चार्ज में PM की हत्या की साजिश लेकर कुछ नहीं कहा गया है। इस मामले में मिला सबूत ट्रायल का हिस्सा होगा।

स्टूडेंट्स को आतंकी गतिविधियों के लिए भर्ती करने का आरोप
ड्राफ्ट में कहा गया है कि आपराधिक साजिश का इरादा भारत से एक हिस्से को अलग करना और लोगों को इस तरह के अलगाव के लिए उकसाना था। आरोपियों का इरादा विस्फोटक पदार्थों का इस्तेमाल करके लोगों के मन में आतंक पैदा करना था। इसमें दावा किया गया है कि आरोपियों ने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) और टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंस (TISS) समेत दूसरी यूनिवर्सिटी के स्टूडेंट्स को आतंक फैलाने के लिए भर्ती किया था।

आरोपी रोना विल्सन का लैपटॉप हैक होने का दावा
पुणे पुलिस ने दावा किया है कि उन्होंने मौके से एक चिट्ठी बरामद की थी। इस मामले में आरोपी रोना विल्सन का दावा है कि उनके लैपटॉप को हैक कर उसमें फर्जी ढंग से नकली सबूत प्लांट किए गए। विल्सन ने बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका दायर कर उनके खिलाफ लगे आरोप वापस लेने और चार्जशीट को रद्द करने को कहा है।

उन्होंने हाईकोर्ट के सामने डिजिटल फोरेंसिक रिपोर्ट पेश की है, जिसमें बताया गया है कि उनके लैपटॉप को हैक किया गया था। रोना की गिरफ्तारी के पहले दस अक्षर प्लांट किए। इन अक्षरों का इस्तेमाल पहले पुणे पुलिस और बाद में NIA ने सबूत के तौर पर किया।

पुणे में ऐसे हुई थी हिंसा
31 दिसंबर 2017 को एल्गार परिषद सम्मेलन का आयोजन किया गया था। इसमें दिए गए भड़काऊ भाषणों के कारण अगले दिन 1 जनवरी 2018 को पुणे जिले के भीमा कोरेगांव युद्ध स्मारक के निकट हिंसा हुई थी। इसमें एक युवक की जान चली गई थी। साथ ही करोड़ों की सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान हुआ था।

16 आरोपी गिरफ्तार और 5 फरार
इस मामले में कुल 16 आरोपी गिरफ्तार हैं और 5 को फरार बताया गया है। गिरफ्तार आरोपियों में कार्यकर्ता सुधा भारद्वाज, वर्नोन गोंजाल्विस, वरवर राव, हनी बाबू, आनंद तेलतुम्बडे, शोमा सेन, गौतम नवलखा और अन्य शामिल हैं।

वहीं, भीमा कोरेगांव हिंसा मामले में आरोपी फादर स्टेन स्वामी की मौत हो गई है। वो लंबे समय से बीमार थे। उनकी मौत के बाद दूसरे आरोपियों को रिहा करने की मांग तेज हो गई है।

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