नई दिल्ली
केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दायर कर बताया है कि पिछड़े वर्ग (OBC) की जातिगत जनगणना प्रशासनिक रूप से कठिन और बोझिल काम है। इसलिए सोच समझकर एक नीतिगत फैसले के तहत इस तरह की जानकारी को जनगणना के दायरे से अलग रखा गया है।
सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय ने अपने हलफनामे में यह भी बताया कि सामाजिक-आर्थिक और जाति जनगणना (SECC) 2011 में जातिगत जनगणना गलतियों से भरी हुई थी। जाति से संबंधित जनगणना के रिकॉर्ड विश्वसनीय नहीं है। ऐसे में किसी भी तरह का आरक्षण, रोजगार या स्थानीय चुनाव के लिए कोई फैसला इसके आधार पर करना सही नहीं होगा।
अलग से गिनती का निर्देश ने देने की गुजारिश
केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से गुजारिश की है कि 2021 की जातिगत जनगणना में ओबीसी आबादी की अलग से गिनती करने का निर्देश न दिया जाए। सरकार ने कहा कि SECC 2011 सर्वेक्षण ओबीसी सर्वे नहीं है, जैसा कि आरोप लगाया जाता है, बल्कि ये देश में सभी घरों में जातीय स्थिति का पता लगाने की व्यापक प्रक्रिया थी।
केंद्र ने अन्य जातियों के बारे में जानकारी जनगणना से बाहर रखा है और यह नीतिगत फैसला है जो सोच विचार कर लिया गया है। सुप्रीम कोर्ट में इस मामले में 26 अक्टूबर को सुनवाई होनी है।
महाराष्ट्र सरकार ने लगाई है याचिका
सुप्रीम कोर्ट में महाराष्ट्र सरकार की ओर से याचिका दायर की गई है। जिसमें मांग की गई है कि केंद्र और संबंधित अथॉरिटी को निर्देश दिया जाए कि वह राज्य को सामाजिक-आर्थिक और जाति जनगणना (SECC) 2011 में दर्ज ओबीसी के जातीय आंकड़ों की जानकारी मुहैया कराएं। याचिका में राज्य सरकार ने कहा कि उन्होंने बार-बार इसके लिए केंद्र से गुहार लगाई लेकिन उन्हें जानकारी नहीं दी गई।
नीतीश कुमार भी कर चुके हैं जातिगत जनगणना की मांग
भाजपानीत केंद्र की NDA सरकार के प्रमुख सहयोगी और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी जातिगत जनगणना की मांग कर चुके हैं। वे इसके लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी मुलाकात कर चुके हैं। बिहार में राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के वरिष्ठ नेता लालू प्रसाद यादव भी इसके लिए राज्य और केंद्र सरकार को कई बार घेर चुके हैं।