पिछले महीने एक दिन अचानक एशिया के सर्राफा बाजार में सोने का भाव धराशायी हो गया था। 9 अगस्त को वह 15 मिनट के भीतर 4% टूटकर 1,700 डॉलर प्रति औंस से नीचे आ गया था। कुछ जानकारों ने उसे ‘फ्लैश क्रैश’ बताया, यानी सारा किया धरा कंप्यूटर ट्रेडिंग प्रोग्राम का था।
अगले एक साल में 2,100-2,200 डॉलर तक जा सकता है
इन सबके बीच केडिया एडवाइजरी के डायरेक्टर अजय केडिया का कहना है कि सोने के फंडामेंटल मजबूत बने हुए हैं। इसका भाव अगले एक साल में 2,100-2,200 डॉलर प्रति औंस और इंडिया में 53,000-54,000 प्रति दस ग्राम तक जा सकता है। बशर्ते यह 1,650-1,660 डॉलर प्रति औंस से नीचे न आ जाए।
राहत पैकेज वापस लिए जाने की अटकलें लगने लगी थीं
‘फ्लैश क्रैश’ की वजहें क्या हो सकती हैं, उसके बारे में वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (WGC) ने अपनी हालिया रिपोर्ट में बताया है। रिपोर्ट के मुताबिक, 6 अगस्त शुक्रवार को सोना 2.3% की कमजोरी के साथ बंद हुआ था। अमेरिका में रोजगार के मजबूत आंकड़ों के चलते राहत पैकेज जल्द वापस लिए जाने की अटकलें लगने लगी थीं।
डॉलर में मजबूती आई थी, बॉन्ड की यील्ड बढ़ी थी
उस दिन दूसरे अहम देशों की करेंसी के मुकाबले डॉलर में मजबूती आई थी। इसके साथ ही बेंचमार्क बॉन्ड की यील्ड में बढ़ोतरी हुई यानी उसकी कीमत में गिरावट आई। इन सबके असर से सोने के दाम पर दबाव बना। बॉन्ड की यील्ड और सोने की कीमत में उलटा संबंध होता है।
15 मिनट में 4 अरब डॉलर से ज्यादा का सोना बिका
फिर नए हफ्ते के पहले दिन यानी सोमवार 9 अगस्त को एशियाई बाजारों में सोना टूट गया। कुछ ही मिनटों में 4 अरब डॉलर से ज्यादा का सोना बिक गया। ऐसा आमतौर पर तब होता है, जब दुनिया में हर तरह के बाजारों में बहुत कम नकदी रहती है।
चार्ट पर ‘डेथ क्रॉस’ नाम का मंदी वाला पैटर्न बना था
WGC के मुताबिक सोने के अचानक टूटने की वजह टेक्निकल एनालिसिस पर आधारित रणनीति हो सकती है। टेक्निशियनों ने सोने के चार्ट पर ‘डेथ क्रॉस’ नाम का पैटर्न बनने की बात कही थी। इस पैटर्न में प्राइस से जुड़ा 50 डे मूविंग एवरेज (DMA) 200 DMA से नीचे चला जाता है। यह पैटर्न एसेट में मंदी का संकेत माना जाता है।
1,700 डॉलर के पास लगाए स्टॉप लॉस ट्रिगर हुए होंगे
दूसरी वजह यह हो सकती है कि 1,700 डॉलर के आस-पास लगाए स्टॉप लॉस ऑर्डर ट्रिगर हुए होंगे। बड़े नुकसान से बचने के लिए ऑर्डर में तय किए गए प्राइस के ट्रिगर होने यानी नीचे के रेट पर बिक्री होने से सोने पर दबाव बढ़ा और बिकवाली होती चली गई। उस दिन अमेरिकी बाजार में भी सोने का भाव लगभग दो पर्सेट गिरा था।
अगले एक साल सोने में तेजी जारी रह सकती है
अजय केडिया के मुताबिक, अगले एक साल के लिहाज से सोने में तेजी रह सकती है। उन्होंने इसकी कई वजहें बताईं। अमेरिकी जॉब मार्केट में अस्थिरता है। डॉलेक्स और बॉन्ड यील्ड में कमजोरी है। दुनिया भर में लिक्विडिटी ज्यादा है, जिससे महंगाई बढ़ी हुई है। जियो पॉलिटिकल टेंशन बना हुआ है और ट्रेड वॉर का टेंशन कम नहीं हुआ है।
घरेलू बाजार में शादी-ब्याह का सीजन का सपोर्ट
शादी-ब्याह का सीजन आ रहा है। ऐसे में कोविड के चलते दबी डिमांड सामने आ रही है। इसके अलावा रियल्टी मार्केट ठंडा पड़ा है। कोरोना को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं। इक्विटी मार्केट में वैल्यूएशन हाई बना हुआ है। गोल्ड में निवेश के ऑप्शन बढ़े हैं। ऐसे में निवेशकों का रुझान फिजिकल गोल्ड से ज्यादा डिजिटल गोल्ड में बन सकता है।