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घुटना डिसलोकेट होने के बावजूद जीता मेडल:टोक्यो पैरालिंपिक में अपने इवेंट से एक रात पहले दर्द से चीख रहे थे भारतीय एथलीट शरद कुमार, भगवत गीता पढ़कर मिला हौसला

टोक्यो पैरालिंपिक में बुधवार को भारत को तीन मेडल मिले। इनमें से दो मेडल पुरुषों की T42 कैटेगरी के हाई जंप इवेंट में मिले। मरियप्पन थंगावेलू ने सिल्वर और शरद कुमार ने ब्रॉन्ज मेडल जीता। शरद कुमार ने इवेंट के बाद बताया कि एक रात पहले ही उनका घुटना डिसलोकेट हो गया था। वे ठीक से चल भी नहीं पा रहे थे। परिवार के सदस्यों, साथी एथलीट्स और दोस्तों ने संबल लिया। फिर रात में उन्होंने भगवत गीता पढ़ी और इससे प्रभावित होकर इवेंट में हिस्सा लिया।

ऐसा लग रहा था किसी पाप की सजा मिली है
शरद ने बताया कि घुटना चोटिल होने के बाद उन्होंने घर फोन किया था। शरद ने अपने परिवार वालों से कहा- सब खत्म हो गया। लगता है मुझे किसी पाप की सजा मिल रही है। फिर परिवार वालों और साथियों ने शरद का हौसला बढ़ाया और उन्हें इवेंट में पार्टिसिपेट करने की हिम्मत दी।

हर जंप के लिए झेला असहनीय दर्द
शरद ने बताया कि हाई जंप में घुटना चोटिल हो तो काम बहुत मुश्किल हो जाता है। शरद के संघर्ष का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वे उस इवेंट में हिस्सा लेते हैं जिसमें ऐसे एथलीट शामिल होते हैं जिनका एक आधा नहीं होता है। इसके बावजूद उन्होंने असहनीय दर्द झेलते हुए मेडल जीतने में कामयाबी हासिल की।

हर जंप युद्ध के समान
शरद ने बताया कि इवेंट के दौरान उनके लिए हर जंप एक युद्ध के समान था और वे हर युद्ध को जीतना चाहते थे। पिछली रात उन्होंने भगवत गीता का पाठ किया था। शरद कहते हैं- गीता से सीख मिली कि जो कुछ हो रहा है वह हमारे नियंत्रण में नहीं है। इसलिए मैंने निराशा को पीछे छोड़कर अपना काम करने की कोशिश की। मैंने ईश्वर का शुक्रिया कहा कि मैं पार्टिसिपेट कर पाया।

कंडीशंस अच्छे नहीं थे
शरद के कहा- इवेंट के दौरान बारिश हो रही थी। सबकुछ काफी गीला था। हम चोटिल भी हो सकते थे। हमने ऑफिशियल्स से इवेंट को स्थगित करने को लेकर बात भी की, लेकिन यह जारी रहा। फिर हमने कंडीशन के हिसाब से रणनीति बनाई और उसपर अमल किया।

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