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जयपुर में दो दोस्तों ने खोला वाहन चोरी का धंधा

  • 6 महीने में 70 बाइक चुराई; डिमांड पर पूरा करते थे टास्क
    जयपुर।
    जयपुर में पढ़ाई करने वाले दो दोस्तों के वाहन चोरी का धंधा खोल लिया। वे डिमांड के अनुसार बाइक चोरी कर अपना टास्क पूरा करते। 6 महीने में अपने साथियों के साथ मिलकर दोनों बदमाशों ने 70 बाइक चोरी कर डाली। महेश नगर थाना पुलिस ने दोनों वाहन चोर दोस्तों को अरेस्ट किया है।
    पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से चोरी की 15 बाइक बरामद की है। फिलहाल गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के साथ ही फरार साथी बदमाशों की तलाश की जा रही है। पूछताछ में बदमाशों ने चोरी की बाइक को औने-पौने दामों में बेचकर शराब के नशे का शौक पूरा करना बताया है।
    एसीपी (सोडाला) श्याम सुंदर ने बताया कि वाहन चोरी में आरोपी अजय मीणा (19) पुत्र मनोहर लाल निवासी महुखेडा महुवा दौसा और राजेश मीणा (22) पुत्र रामप्रसाद निवासी गांव भझेडा रैणी अलवर को अरेस्ट किया है।
    करतारपुरा के माधव नगर में दोनों किराए से रहकर पढ़ाई करते हैं। बाइक चोरी की कई वारदातों के सीसीटीवी फुटेज में भी दोनों दिखाई दिए थे। हेड कॉन्स्टेबल भीम सिंह ने फुटेज के आधार पर दोनों वाहन चोरों को धर-दबोचा। पूछताछ में आरोपियों ने अपने साथियों के साथ मिलकर बाइक चोरी करना स्वीकार किया। पुलिस टीम ने आरोपियों के बताई जगह दौसा के महुखेडा से चोरी की 15 बाइक बरामद की।
    एसएचओ (महेश नगर) सरोज धायल ने बताया कि दोनों आरोपियों के साथ रहने के कारण दोस्ती हो गई थी। शराब के शौक को पूरा करने के लिए बाइक चुराना तय हुआ।
    दोनों ने करीब 6 महीने पहले एक बाइक चोरी कर दौसा ले जाकर बेची थी। चोरी की बाइक बेचकर मिले औने-पौने रुपयों से अपना शौक पूरा किया। उसके बाद से वाहन चोरी को उन्होंने धंधा बना लिया।
    रात के अंधेरे में बाइक चोरी कर अपने कमरे पर ले जाते। जिसके बाद जल्द सुबह चोरी की बाइक लेकर दौसा निकल जाते थे।
    एसएचओ (महेश नगर) सरोज धायल ने बताया कि पूछताछ में सामने आया कि वाहन चोर गैंग ने पिछले 6 महीने में करीब 70 बाइक चोरी की वारदात को अंजाम दिया है।
    ये बाइक्स महेश नगर, मानसरोवर, बजाज नगर, ज्योति नगर , करणी विहार, श्याम नगर और सोडाला इलाके से चुराई गई हैं। वाहन चोरी करने के कुछ समय बाद ही गैंग ने डिमांड पर बाइक चोरी करना शुरू कर दिया। डिमांड मिलने पर ट्रेन से बैठकर किराए के रूम पर आकर रूकते।
    रात के समय में अपना टास्क पूरा कर सुबह दौसा निकल जाते थे। चोरी की बाइक को 10 से 30 हजार रुपए की कीमत पर गांव के लोगों को उपलब्ध करवा देते थे। पकड़े जाने से बचने के लिए इंजन व चेसिस नंबर को रगड़ कर मिटाने के साथ रजिस्ट्रेशन नंबर भी चेंज कर देते थे।