जयपुर
राजस्थान में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और सचिन पायलट खेमों के बीच खींचतान जारी है। दोनों ही गुट एक दूसरे के खिलाफ रणनीतिक चालें चल रहे हैं। गहलोत समर्थक 13 निर्दलियों और बसपा से कांग्रेस में आए 6 विधायकों के क्षेत्रों में हारने वाले कांग्रेस उम्मीदवारों ने मोर्चा खोल दिया है। विधायकों के 19 में से 15 उम्मीदवारों ने सोनिया गांधी को चिट्ठी लिखकर मिलने का वक्त मांगा है। चिट्ठी में 15 कांग्रेस उम्मीदवारों के हस्ताक्षर हैं।
कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ चुके 15 उम्मीदवार सचिन पायलट समर्थक हैं, इन्हें पायलट की सिफारिश पर ही टिकट मिले थे। अब इन उम्मीदवारों ने सोनिया गांधी को चिट्ठी लिखकर उनके क्षेत्रों में कांग्रेस की उपेक्षा और संगठन कमजोर करने का मुद्दा उठाया है। इस चिट्ठी के पीछे पायलट कैंप की रणनीति बताई जा रही है, हांलाकि चिट्ठी में पायलट का जिक्र नहीं हैं, कांग्रेस को हराने वाले 19 विधायकों को अब तवज्जो मिलने से पार्टी संगठन को हो रहे नुकसान का मुद्दा उठाया गया है।
हारे हुए कांग्रेस उम्मीदवारों ने लिखा- निर्दलीयों और बसपा वालों की सीटों पर कांग्रेस कार्यकर्ता और वोटर ठगा सा महसूस कर रहा
कांग्रेस के टिकट पर हारने वाले 15 उम्मीदवारों ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को लिखा- निर्दलीय और बसपा से आने वाले विधायकों के क्षेत्रों में कांग्रेस कायकर्ताओं की ढाई साल से अनदेखी हो रही है। सरकार के ढाई साल के कार्यकाल में अफसरों-कर्मचारियों के ट्रासंफर नियुक्ति से लेकर पार्षद मनोनयन तक में बसपा से आने वालों और निर्दलीय विधायकों की ही चल रही है। निर्दलियों और बसपा से अपने वाले विधायकों के क्षेत्रों में कांग्रेस संगठन के ढांचे को खत्म किया जा रहा है। निर्दलियों और बसपा से आने वालों के आगे प्रदेश संगठन झुका हुआ है। नगरपालिका और पंचायत चुनावों में इनके कहने से ही टिकट बांटे गए, जबकि पार्टी के उम्मीदवारों की भागीदारी शून्य रही। 2018 के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस के पक्ष में वोट करने वाला कार्यकर्ता और वोटर ठगा हुआ सा महसूस कर रहा है।
चिट्ठी में कांग्रेस के इन 15 हारे हुए उम्मीदवारों के साइन
सोनिया गांधी को लिखी चिट्ठी में 15 नेताओं के हस्ताक्षर हैं। इनमें मनीष यादव, सुभाष मील खंडेला, राजेश अग्रवाल, दौलत सिंह मीणा, डॉ आरसी यादव, भगवानाराम सैनी, सुनील कुमार शर्मा, अजय बोहरा, रितेश बैरवा, जीवारााम आर्य, मुरारीलाल, दर्शन सिंह, हिमांशु कटारा, अशोक कुमार चांडक और डॉ. करण सिंह यादव।