कोविड के कहर से घरेलू कंपनियों की आर्थिक सेहत काफी तेजी से उबरी है। इसका पता जून तिमाही में डाउनग्रेड के मुकाबले सबसे ज्यादा कंपनियों की क्रेडिट रेटिंग में हुए अपग्रेड से चला है। महामारी की शुरुआत से क्रेडिट रेटिंग डाउनग्रेड में बढ़ोतरी का रुझान पलट गया और अपग्रेड होने वाली कंपनियों की संख्या काफी ज्यादा रही है। कई सरकारी राहत पैकेज जारी होने से कंपनियों का कारोबार सामान्य हुआ है और उनकी लोन चुकाने की कैपेसिटी बेहतर हुई है।
क्रेडिट रेशियो जून तिमाही में 2.08 पर पहुंच गया जो मार्च तिमाही में 1.7 था
कारोबार जगत की आर्थिक सेहत के बारे में बताने वाला क्रेडिट रेशियो जून तिमाही में 2.08 पर पहुंच गया जो मार्च तिमाही में 1.7 था। प्राइम एक्वायट क्रेडिट रेटिंग माइग्रेशन डेटाबेस से पता चला है कि इस दौरान 771 कंपनियां अपग्रेड और 370 कंपनियां डाउनग्रेड की गईं। डेटाबेस में सात क्रेडिट रेटिंग कंपनियों- एक्वायट, ब्रिकवर्क, केयर, क्रिसिल, इकरा, इंडिया रेटिंग्स और इन्फोमेरिक्स के डेटा शामिल हैं।
पिछली जून तिमाही में 241 कंपनियां अपग्रेड जबकि 662 कंपनियां डाउनग्रेड हुई थीं
क्रेडिट रेशियो यानी रेटिंग डाउनग्रेड के मुकाबले अपग्रेड वाली कंपनियों की संख्या पिछली जून तिमाही से लगातार बढ़ रही है। उस दौरान यह रेशियो 0.36 था जब 241 कंपनियों को अपग्रेड किया गया था, जबकि 662 कंपनियां डाउनग्रेड हुई थीं। इस साल की मार्च तिमाही में यह रेशियो बढ़कर 1.77 हो गया। इसके एक से नीचे होने का मतलब कुल-मिलाकर कंपनियों की सेहत खराब हुई है।
इकोनॉमी को सपोर्ट देने के लिए RBI की कोशिशों, सरकार के खर्च का फायदा
इकरा रेटिंग्स के डिप्टी चीफ रेटिंग ऑफिसर के रविचंद्रन के मुताबिक, ‘जून तिमाही में हुए रेटिंग अपग्रेड की वजह इकोनॉमी को सपोर्ट देने के लिए RBI की कोशिशों, सरकार की तरफ से हुआ खर्च और कंपनियों के अन्य खर्च में कटौती रही। लोन रिस्ट्रक्चरिंग प्रोग्राम से भी कंपनियों को फायदा हुआ है। मुमकिन है कि इसकी वजह से कई कंपनियां डाउनग्रेड होने से बच गईं।’
रेटिंग अपग्रेड में पावर, रियल एस्टेट, फार्मा और केमिकल सेक्टर की कंपनियां आगे
जिन सेक्टर की कंपनियों की रेटिंग अपग्रेड हुई है, उनमें पावर, रियल एस्टेट, फार्मा और केमिकल आगे हैं। एक्वायट रेटिंग्स के चीफ एनालिटिकल ऑफिसर सुमन चौधरी के मुताबिक, ‘टीकाकरण अभियान के जोर पकड़ने से उन सेक्टरों में भी कारोबारी हालात सामान्य हुए हैं, जहां फिजिकल प्रेजेंस जरूरी होता है।’ गौरतलब है कि स्टील के रिकॉर्ड हाई प्राइस से इस सेक्टर की कंपनियों में नई जान आई। सरकार और RBI के उपायों से बैंकिंग सेक्टर में 5.45 लाख करोड़ रुपए की अतिरिक्त नकदी हो गई है।
कमोडिटी सेक्टर में तेजी का चक्र शुरू होने से मेटल कंपनियों को फायदा
केयर रेटिंग्स के चीफ रेटिंग ऑफिसर सचिन गुप्ता कहते हैं, ‘इकोनॉमी पर दूसरी लहर का असर व्यापक नहीं रहा क्योंकि सप्लाई चेन से जुड़ी एक्टिविटी जस की तस रही। कमोडिटी सेक्टर में तेजी का चक्र शुरू होने से स्टील या मेटल जैसे कई सेक्टर की कंपनियों को फायदा हुआ।’