पहले सभापति ने,अब पार्षद लगा रहे सुनवाई नहीं होने का आरोप
श्रीगंगानगर। नगरपरिषद में सालों से चली आ रही डर्टी पॉलिटिक्स के कारण हर बार शहर की जनता को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। पिछले आठ साल से नगर परिषद में आयुक्त को लेकर जारी लड़ाई एक बार फिर सड़कों पर लड़ी जा रही है। हालत यह है कि जब सरकार द्वारा नगरपरिषद में स्थाई आयुक्त की नियुक्ति की गई थी। उस दौरान कई बार सभापति आयुक्त पर सुनवाई नहीं करने का आरोप लगा चुकी है। इतना ही नहीं सभापति ने केवल सुनवाई करने का बल्कि किसी भी प्रकार के टेण्डर और कार्य की जानकारी देने की बात भी कह चुकी है। 6 जुलाई को निजी कार्यालय से पत्र क्रमांक 226-1 में भी सभापति ने स्थाई आयुक्त को इस संबध में एक पत्र लिख कर उनके द्वारा दिए गए दिशा निर्देश की पालना नहीं करने और उनकी स्वीकृति के बिना टेण्डर नहीं लगाने सहित कई शिकायतों को लेकर पत्र लिखा था। इसके कुछ समय बाद हुई अतिवृष्टि को देखते हुए मानसून पूर्व तैयारी उचित तरीके से नहीं करने पर आयुक्त को हटा कर एसडीएम को कार्यवाहक आयुक्त लगा दिया। पहले जहां सभापति द्वारा स्थाई आयुक्त पर सुनवाई नहीं करने का आरोप लगाया जाता था। वहीं आरोप पार्षदों ने कार्यवाहक आयुक्त पर लगाते हुए स्थाई आयुक्त की मांग को लेकर कलक्टरेट के बाहर धरना लगा दिया। ऐसे में अब जनता यह नहीं समझ पा रही है कि जब स्थाई आयुक्त था तो सभापति की सुनवाई नहीं हो रही थी तक सभी पार्षद चुप थे और जब प्रशासन ने स्थाई आयुक्त की जगह कार्यवाहक लगा दिया तो इनके द्वारा धरना लगा दिया गया। वहीं धरना के पहले से लेकर अब तक लगातार धरने पर पहुंचने वाले पार्षदों की सख्या कम होती जा रही है। पहले दिन 40 पार्षदों के पहुंचने का दावा किया गया था जबकि पहुंचे 37 से। इसी तरह दूसरे दिन सभी पार्षदों के समर्थन की बात कही गई लेकिन पहुंचे केवल 35 और गुरुवार को इससे भी कम होकर इनकी संख्या 32 तक सिमट गई।