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ड्रोन की नजर से देखें 107 टापुओं का शहर:राजस्थान में दक्षिण भारत जैसी नेचुरल ब्यूटी, बांसवाड़ा का है ये नजारा; स्वर्ग सी वादियों में आप भी खो जाएंगे

बांसवाड़ा

दुनियाभर में राजस्थान का नाम सुनते ही आम आदमी के दिमाग में रेगिस्तान की तस्वीर सामने आने लगती है। लेकिन, आज हम आपको राजस्थान की ऐसी तस्वीर दिखाने जा रहे हैं, जिसे देख आपका राजस्थान के प्रति नजरिया बदल जाएगा। दक्षिण भारत जैसी नेचुरल ब्यूटी का ये नजारा 107 टापुओं के शहर बांसवाड़ा का है। जो राजस्थान के साथ गुजरात और मध्यप्रदेश की सीमा से सटा हुआ है।

चारों तरफ हरियाली से सराबोर बांसवाड़ा।

चारों तरफ हरियाली से सराबोर बांसवाड़ा।

माही नदी में बने टापू पर आज भी ग्रामीण आबादी करती है निवास।

माही नदी में बने टापू पर आज भी ग्रामीण आबादी करती है निवास।

बांसवाड़ा की लाइफ लाइन बन चुकी है माही
हरियाली से लथपथ बांसवाड़ा राजस्थान के दक्षिणी हिस्से में बसा हुआ है। जहां प्राकृतिक सौंदर्य के साथ माही नदी का लगभग 40 किलोमीटर का क्षेत्र बांसवाड़ा की खूबसूरती में चार चांद लगा देता है। इसके साथ ही माही के बैकवाटर में 100 से ज्यादा छोटे-बड़े टापू बांसवाड़ा की पहचान बन चुके हैं। जहां आज भी आदिवासी अंचल के लोग प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग कर अपना जीवन यापन कर रहे हैं।

चाचा कोटा जाने का रास्ता।

चाचा कोटा जाने का रास्ता।

मानसून के दौरान चाचा कोटा का नजारा।

मानसून के दौरान चाचा कोटा का नजारा।

मानसून में स्वर्ग बन जाता है बांसवाड़ा
राजस्थान में सर्वाधिक बारिश बांसवाड़ा में होती है। जिस वजह से बांसवाड़ा को राजस्थान का चेरापूंजी भी कहा जाता है। मानसून के दिनों में बांसवाड़ा में बादलों की आवाजाही इतनी बढ़ जाती है, कि मानो धरती पर स्वर्ग उतर आया हो। ऐसे में बांसवाड़ा के छोटे बड़े टापू यहां की सुंदरता को और बढ़ा देते हैं। इस दौरान यहां फैली हरियाली राजस्थान में दक्षिण भारत का अहसास भी कराती है। जिसकी वजह से बांसवाड़ा को देश के सबसे खूबसूरत शहरों में भी शुमार किया गया है।

बांसवाड़ा को 100 टापुओं का शहर भी कहा जाता है।

बांसवाड़ा को 100 टापुओं का शहर भी कहा जाता है।

माही का पानी सिंचाई और विद्युत उत्पादन में भी उपयोग में लिया जा रहा है।

माही का पानी सिंचाई और विद्युत उत्पादन में भी उपयोग में लिया जा रहा है।

टापू ने की कोरोना से रक्षा
देश-दुनिया में कोरोना संक्रमण की पहली और दूसरी लहर ने तांडव मचा दिया था। लेकिन बांसवाड़ा के माही नदी के बीच बने कई टापू ऐसे हैं। जहां आज तक कोरोना का नामोनिशान भी नहीं पहुंचा है। यहां रहने वाले आदिवासी अंचल के लोग बताते हैं कि हमने संक्रमण के दौर में टापू से बाहर आना जाना पूरी तरह बंद कर दिया था। जिसकी वजह से अब तक हम कोरोना महामारी से बचे हुए हैं। टापू पर रहने वाले सुनील ने बताया कि हम लोग टापू पर ही खेती-बाड़ी और मत्स्य पालन कर अपनी आजीविका चला रहे थे और उसी से रोजी रोटी का जुगाड़ कर रहे थे। ऐसे में यह टापू हमारे लिए घर के साथ ही रक्षक भी बन गया है।

चाचा कोटा में दूर-दूर बने हैं आम आदमी के घर।

चाचा कोटा में दूर-दूर बने हैं आम आदमी के घर।

चाचा कोटा के टापू पर बना भारत के नक्शे का निचला हिस्सा।

चाचा कोटा के टापू पर बना भारत के नक्शे का निचला हिस्सा।

बांसवाड़ा में पर्यटन की असीम संभावनाएं
पर्यटन विभाग की डिप्टी डायरेक्टर शिखा सक्सेना ने बताया कि बांसवाड़ा का प्राकृतिक सौंदर्य अब तक दुनिया की नजरों से दूर है। ऐसे में राजस्थान सरकार द्वारा बांसवाड़ा के पर्यटन को विकसित करने के लिए विशेष बजट का आवंटन किया गया है। जिससे तहत लगभग 8 करोड रुपए खर्च कर बांसवाड़ा को राजस्थान की नई टूरिस्ट डेस्टिनेशन के तौर पर विकसित किया जाएगा। जिससे भविष्य में बांसवाड़ा उदयपुर की तर्ज पर पर्यटकों से आबाद रहे। इसके साथ ही यहां पर होटल रेस्टोरेंट और अन्य मूलभूत सुविधाएं भी विकसित की जाएंगी। ताकि यहां आने वाले पर्यटकों को मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध हो पाए।

गर्मी के दिनों में माही का गिरता जलस्तर।

गर्मी के दिनों में माही का गिरता जलस्तर।

मानसून के दौरान हरियाली की चादर ओढ़े टापू।

मानसून के दौरान हरियाली की चादर ओढ़े टापू।

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