श्रीगंगानगर. एक ही छत के नीचे सरकारी ऑफिस संचालित करने के लिए प्रस्तावित मिनी सचिवालय निर्माण प्रोजेक्ट की भूमि मे से तीस बीघा भूमि नगर विकास न्यास को बेचान के लिए अधिकृत किया गया था।
इस भूमि पर भूखंड बेचने के लिए यूआइटी ने प्रचार प्रसार पर करीब साढ़े तेरह लाख रुपए का बजट खर्च कर दिया। लेकिन अब तक एक भी भूखंड नहीं बिका है। पुरानी शुगर मिल की 130 बीघा भूमि पर मिनी सचिवालय के अलावा कई विभागो के ऑफिस बनने का प्रोजेक्ट था।
यूआईटी ने तीस बीघा भूमि बेचने के लिए अलग अलग प्लाट बनाए थे। इसके लिए बकायदा प्रचार प्रसार भी किया गया। इस पर बजट भी खर्चा लेकिन ग्राहकों ने दिलचस्पी नहीं ली।
पुरानी शुगर मिल की 130 में से 25 बीघा जमीन पर सात मंजिला मिनी सचिवालय बनना था। राज्य सरकार ने राजस्थान राज्य रोड डिवेलपमेंट एंड कंस्ट्रक्शन कॉरपोरेशन को इसकी जिम्मेदारी दी।
यह सरकार की वही एजेंसी है जिसने सुखाडि़या मार्ग और मीरा मार्ग का निर्माण कराया है। इस नोडल एजेंसी ने जीएसटी भवन के लिए निर्माण शुरू किया। इस भवन की लागत ३२ करोड़ रुपए आंकी गई।
लेकिन बजट महज 14 करोड़ रुपए का ही मिल पाया। बजट नहीं होने के कारण यह निर्माण थम गया है। प्रोजेक्ट मैनेजर भीमसेन स्वामी ने बताया कि मिनी सचिवालय भवन के लिए अभी तक सिर्फ डिवाइजन ही तैयार हो पाया है।
जब तक बजट नहीं होगा तब तक इसका निर्माण नहीं हो सकता। बजट जुटाने के लिए यूआईटी को तीस बीघा भूमि आवंटित की लेकिन इसमें से एक भी प्लाट नहीं बिका है।
मिनी सचिवालय भवन का निर्माण 31 जुलाई 2020 तक पूरा होना चािहए था लेकिन बजट की कमी बताकर जिला प्रशासन के साथ साथ अधिकृत विभागों के अधिकारियों ने एक दूसरे को अधिकृत बताकर अपना पल्ला झाड़ लिया।
इस भवन के निर्माण होने से कलक्ट्रेट सहित अधिकांश सरकारी विभाग एक ही छत के नीचे संचालित हो सकते थे। लेकिन धरातल पर इसके लिए प्रयास शुरू नहीं हुए। हालांकि तत्कालीन सीएम वसुंधरा राजे इस मिनी सचिवालय का निर्माण का शिलान्यास जरूर किया था। मिनी सचिवालय सात मंजिला बनना था।