भरतपुर
17 साल की आरती प्रजापत अपने दादा-दादी से मिलने साइकिल से जयपुर से भरतपुर पहुंच गईं। आरती ने जयपुर से 216 किलोमीटर तक का सफर तय किया। आरती की दादी की तबीयत खराब थी। जैसे ही पता लगा तो आरती अपनी दादी से मिलने के लिए साइकिल से निकल गईं। दादा-दादी से मिलने डहरा गांव जाते समय वह रास्ता भटक गईं और आगरा की तरफ निकल गईं।
आरती ने देखा कि उत्तर प्रदेश का फतेहपुर सीकरी मात्र 15 किलोमीटर का बोर्ड लगा है तो उन्हें अहसास हुआ कि वह रास्ता भटक गई हैं। आरती लौटीं और सही रास्ता पकड़ कर अपने दादा-दादी के घर पहुंचीं। वह 20 किलोमीटर आगे चली गई थीं। इस तरह आरती का सफर 40 किलोमीटर अधिक रहा।