दिग्गज एक्टर दिलीप कुमार को एक बार फिर अस्पताल में भर्ती कराया गया है। 98 साल के दिलीप कुमार को मंगलवार को फिर से सांस लेने में दिक्कत होने लगी थी, जिसके चलते उन्हें मुंबई के पीडी हिंदुजा अस्पताल में एडमिट किया गया है। वे अस्पताल के ICU वार्ड में डॉक्टर्स की निगरानी में हैं। वहीं अभी उनकी हालत स्थिर बताई जा रही है।
दिलीप कुमार को नॉन-कोविड-19 ICU वार्ड में रखा गया है
अस्पताल के सूत्रों ने बताया कि दिलीप कुमार को एक नॉन-कोविड-19 ICU वार्ड में रखा गया है। उन्हें सांस लेने में तकलीफ हुई थी, जिसके बाद उन्हें दोबारा अस्पताल लाया गया। सांस लेने में तकलीफ और उनकी उम्र को देखते हुए फैमिली ने एहतियात के तौर पर उन्हें अस्पताल में भर्ती करने का फैसला किया है। वे अभी ठीक हैं और ICU में हैं, ताकि डॉक्टर्स उनकी अच्छे से देखरेख कर सकें। अस्पताल में दिलीप कुमार के साथ उनकी पत्नी और एक्ट्रेस सायरा बानो भी मौजूद हैं।
6 जून को भी सांस लेने में तकलीफ के चलते अस्पताल में हुए थे भर्ती
इस महीने में यह दूसरी बार है, जब दिलीप कुमार को सांस लेने में तकलीफ होने के कारण अस्पताल में भर्ती कराया गया है। दिलीप कुमार को इससे पहले 6 जून को अस्पताल में एडमिट किया गया था। तब उन्हें बाइलेटरल प्ल्यूरल इफ्यूजन हुआ था। इस बीमारी में छाती के अन्दर फेफड़े के चारों ओर पानी का जमाव हो जाता है, जिसे मेडिकल भाषा में ‘प्ल्यूरल इफ्यूजन’ कहते हैं। छाती में बार-बार पानी का जमाव होने से फेफड़े पर दबाव की वजह से सांस फूलने लगती है। डॉक्टर्स ने प्ल्यूरल एस्पिरेशन के जरिए उनके फेफड़ों के पास जमा पानी को बाहर निकाल दिया था। तब पांच दिन तक अस्पताल में रहने के बाद उन्हें छुट्टी दे दी गई थी।
पद्मभूषण, दादा साहब अवॉर्ड से सम्मानित
दिलीप कुमार का असली नाम मोहम्मद यूसुफ खान है। उन्होंने ‘ज्वार भाटा’ (1944), ‘अंदाज’ (1949), ‘आन’ (1952), ‘देवदास’ (1955), ‘आजाद’ (1955), ‘मुगल-ए-आजम’ (1960), ‘गंगा जमुना’ (1961), ‘क्रान्ति’ (1981), ‘कर्मा’ (1986) और ‘सौदागर’ (1991) समेत 50 से ज्यादा बॉलीवुड फिल्मों में काम किया है। बेहतरीन अदाकारी के लिए उन्हें 8 बार बेस्ट एक्टर के तौर पर फिल्मफेयर अवॉर्ड मिला। हिंदी सिनेमा के सबसे बड़े सम्मान दादा साहेब फाल्के अवॉर्ड से भी उन्हें सम्मानित किया जा चुका है। 2015 में सरकार ने उन्हें देश का दूसरा सबसे बड़ा सम्मान पद्म भूषण भी दिया था।