जयपुर।
राजस्थान की पूर्व सीएम वसुंधरा राजे ने दिल्ली दौरे के बाद एक बार फिर से खामोशी धारण कर ली है। भाजपा के स्थापना दिवस पर पार्टी के प्रदेश कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम और फिर पार्टी की रैली से दूरी बनाकर वसुंधरा राजे ने संकेत दे दिया है कि उनकी नाराजगी बरकरार है। जानकारों को का कहना है कि पूर्व सीएम वसुंधरा राजे ने दिल्ली की यात्रा कर पार्टी हाईकमाने के सामने अपने पक्ष में माहौल बनाने की कोशिश की थी। उल्लेखीय है कि पूर्व सीएम वसुंधरा राजे ने दो सप्ताह पहले ही दिल्ली में पीएम मोदी समेत केंद्रीय मंत्रियों से मुलाकात की थी। इस मुलाकात को विधानसभा चुनाव 2023 में मुख्यमंत्री पद का चेहरा घोषित करने के लिए दबाव बनाने के तौर पर देखा जा रहा था।
वसुंधरा की मांगों पर पार्टी नेतृत्व ने साधी चुप्पी
वसुंधरा राजे की पीएम मोदी से मुलाकात को विधानसभा चुनाव 2023 में मुख्यमंत्री पद का चेहरा घोषित करने के लिए दबाव बनाने के तौर पर देखा जा रहा था। यह भी माना जा रहा था कि वसुंधरा राजे केंद्रीय नेतृत्व को यह संदेश देना पहुंचाना चाहती थीं कि राजस्थान में प्रदेश भाजपा नेतृत्व ठीक से काम नहीं कर रहा है। लेकिन वसुंधरा की दोनों ही मांगों पर भाजपा के शीर्ष नेतृत्व ने चुप्पी साध ली। हालांकि, दिल्ली यात्रा के दौरान वसुंधरा राजे ने पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को साफ तौर पर कुछ भी नहीं कहा। सिर्फ संकेत दिए।