आज वर्ल्ड फोटोग्राफी डे है, लेकिन दुनिया की तस्वीर ठीक नहीं। पिछले डेढ़ साल से भारत समेत पूरी दुनिया से सामने आई तस्वीरों ने पूरी इंसानियत को हिला कर रख दिया। अब अफगानिस्तान से आ रहीं तस्वीरें बेहद दर्दनाक हैं।
जुलाई के पहले हफ्ते में काबुल के पास बगराम एयरबेस से अमेरिकी फौज के आखिरी जत्थे के निकलते ही तालिबानी लड़ाकों ने सभी बड़े शहरों पर चढ़ाई कर दी और 15 अगस्त को सरकारी फौज से झपटी गाड़ियों पर सवार होकर काबुल में घुस गए। आज तालिबान का सफेद परचम काबुल पर लहरा रहा है।
दुनिया तालिबान की गति से भले ही चौंकी हुई हो, मगर भारतीय फोटोग्राफर दानिश सिद्दीकी ने इसे पहले ही पहचान लिया था। वो सरकारी फौज के साथ अफगानिस्तान में तालिबान को रोकने की छुटपुट कोशिशों को दुनिया के सामने लाने लगे। आखिर कंधार के स्पिन बोल्डक जिले में तालिबानी हमले में वो मारे गए। पुलित्जर जीतने वाले दानिश इससे पहले कोरोना महामारी, रोहिंग्या संकट और किसान आंदोलन को अपने कैमरे में बखूबी कैद कर चुके थे।