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दूसरे दिन भी धरने पर डटे, नगर परिषद पर तानाशाही का आरोप

  • बोले, जिन्हें वोट देकर बसाया, आज वही उजाड़ने पर तुले
    हनुमानगढ़ (सीमा सन्देश न्यूज)।
    टाउन में राजकीय जिला चिकित्सालय के बाहर बने कियोस्क तोड़ने के लिए नगर परिषद की ओर से नोटिस दिए जाने के विरोध में कियोस्क धारियों का दुकानों के समक्ष धरना शुक्रवार को दूसरे दिन भी जारी रहा। साथ ही अपनी-अपनी दुकानें बंद रखीं। हालांकि कुछ कियोस्क धारियों ने दुकानों से सामान बाहर निकालना भी शुरू कर दिया। धरने पर बैठे कियोस्क धारियों ने विधायक व नगर परिषद सभापति के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। नगर परिषद पर तानाशाही का आरोप लगाते हुए कहा कि जिन जनप्रतिनिधियों को उन्होंने वोट देकर बसाया आज वही उन्हें उजाड़ने पर तुले हुए हैं। वे करीब 20 सालों से नगर परिषद की ओर से आवंटित कियोस्क में कार्य कर अपना व अपने परिवार का गुजर-बसर कर रहे हैं। लेकिन आज नगर परिषद के अधिकारी ही इस जगह को अतिक्रमण बताकर कियोस्क धारियों को उजाड़ने पर उतारु हैं। इससे वे सड़कों पर आ जाएंगे। इस मौके पर कियोस्क धारी नवाब अली ने बताया कि उन्हें करीब 19-20 साल पहले राजकीय जिला चिकित्सालय के सामने कियोस्क आवंटित किए गए थे। कुछ दिन पहले नगर परिषद ने दुकानदारों को यह कहकर नोटिस थमा दिया कि उन्होंने अतिक्रमण किया हुआ है। इसलिए इन दुकानों को तोड़ा जाएगा। इसके बाद गुरुवार सुबह भी नगर परिषद के कर्मचारी आए और कहा कि वे दुकानों से सामान निकाल लें। शुक्रवार सुबह 6 बजे नगर परिषद की ओर से दुकानें तोड़ने की कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि वे इसके खिलाफ हैं क्योंकि उन्होंने किसी तरह का अतिक्रमण नहीं किया। नगर परिषद की ओर से बनाई गई नाली से पीछे हटकर दुकानें बनी हुई हैं। वे नगर परिषद को दुकानें नहीं तोड़ने देंगे। डटकर विरोध किया जाएगा क्योंकि उनकी रोजी-रोटी का यही दुकानें एकमात्र जरिया है। इसलिए उन्हें बेवजह परेशान न किया जाए। लीलूसिंह ने बताया कि उन्हें 1999 में मुख्यमंत्री योजना के तहत कियोस्क आवंटित हुआ था। लेकिन अब नगर परिषद अधिकारी अपनी मनमर्जी कर उन्हें यहां से हटाने पर तुले हुए हैं। यहां करीब 40 दुकानें हैं। अगर उनकी दुकानें तोड़ी गई तो वे सड़कों पर आ जाएंगे। नगर परिषद ने ही दुकानें आवंटित की थीं, अब नगर परिषद ही उन्हें यहां से हटाना चाहती है। दायरे में रहकर कार्य करने के बावजूद उन्हें बेवजह परेशान किया जा रहा है। लेकिन नगर परिषद की कार्रवाई का डटकर विरोध किया जाएगा। उन्होंने विधायक से गुहार लगाई कि उनका रोजी-रोटी का एकमात्र जरिया न छीना जाए।