Wednesday, May 13निर्मीक - निष्पक्ष - विश्वसनीय
Shadow

धर्मांतरण के खिलाफ अर्जी SC ने की खारिज, कहा- पब्लिक इंटरेस्ट से ज्यादा यह पब्लिसिटी इंटरेस्ट

नई दिल्ली

सुप्रीम कोर्ट ने मद्रास उच्च न्यायालय के धर्मांतरण पर सुनाए फैसले के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया। इस याचिका में कथित रूप से हिंदू धर्म से अन्य धर्मों में जबरन धर्मांतरण का मुद्दा उठाया गया था। कोर्ट ने कहा कि यह याचिका ‘प्रचार हित’ से अधिक कुछ नहीं है और इस तरह की दलीलें सद्भाव को बिगाड़ने का काम करती हैं। 

न्यायमूर्ति इंदिरा बनर्जी और न्यायमूर्ति ए एस बोपन्ना की पीठ ने कहा कि आप वास्तव में इस तरह की याचिकाओं से सामंजस्य बिगाड़ रहे हैं। पीठ ने कहा कि यह याचिका जनहित के बजाय प्रचार हित की अधिक है और इसे तुरंत खारिज कर दिया जाना चाहिए। याचिकाकर्ता ने मद्रास उच्च न्यायालय की मदुरै पीठ के पिछले साल मार्च में एक जनहित याचिका पर दिए आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें केंद्र और तमिलनाडु राज्य सहित अन्य से ईसाई मिशनरियों की गतिविधियों पर निगरानी के लिए बोर्ड स्थापित करने का निर्देश देने की मांग की गई थी। 

हाई कोर्ट ने अपने आदेश में उल्लेख किया कि विशेष सरकारी वकील ने तमिलनाडु जबरन धर्मांतरण निषेध अधिनियम, 2002 की एक प्रति प्रस्तुत की है, जिसमें बल के उपयोग से जबरन धर्म बदलने पर रोक लगाने का प्रावधान करता है। अदालत ने कहा कि हम आशा और विश्वास कर सकते हैं कि इस अधिनियम के प्रावधानों का ठीक से पालन होगा।