आधा है चंद्रमा रात आधी गाना सुनते ही जिस शख्स का चेहरा जहन में आता है वो हैं स्टार महिपाल। ये वही महिपाल हैं जिन्होंने देश की पहली मारवाड़ी फिल्म नजराना से अपने अभिनय करियर की शुरुआत की। मारवाड़ी फिल्मों के बाद इन्हें हिंदी फिल्मों में काम करने का अवसर मिला जहां इन्होंने माइथोलॉजिकल फिल्मों में कभी भगवान राम, कभी भगवान कृष्ण तो कभी विष्णु बनकर खूब वाहवाही लूटी।
हिंदी फिल्मों में सबसे ज्यादा भगवानों का रोल प्ले करने का रिकॉर्ड भी इन्हीं के पास है। करीब 35 से ज्यादा फिल्मों में भगवान या भक्त के रोल में नजर आए। ये फैंटेसी फिल्मों के लिए भी अलग पहचान रखते थे अली बाबा से लेकर हातिमताई तक सभी के रोल किए। तुलसीदास भी बने और अभिमन्यु भी। 1959 में आए वी शांताराम की फिल्म नवरंग से महिपाल को देशभर में पहचान मिल गई।
1942 में नजराना से शुरू हुआ महिपाल का फिल्मी सफर 1984 की फिल्म अमर ज्योति तक जारी रहा। 1984 से 2005 के बीच वे सिर्फ एक इंटरव्यू में ही दिखाई दिए। 2005 में 86 साल की उम्र में महिपाल दुनिया से विदा हो गए। आज महिपाल की डेथ एनिवर्सरी के मौके पर आइए जानते हैं इनकी जिंदगी से जुड़ी कुछ खास बातें-
बचपन में ही कविताएं लिखीं, मां की मौत के बाद दादा ने संभाला
महिपाल भंडारी का जन्म 24 नवम्बर 1919 को जोधपुर, राजस्थान में हुआ। महज 6 साल की उम्र में मां गुजर गई तो बचपन दादाजी के साथ बीता। कविता लिखने का गुर महिपाल को उनके दादाजी श्री बजरंग चंद से मिली जो उस जमाने के एक मशहूर राइटर थे।
स्कूलिंग पूरी करने के बाद महिपाल ने लिटरेचर में पढ़ाई की। उन्हें बचपन से ही कला को करीब से जानने में दिलचस्पी थी और पढ़ाई में अव्वल होने के कारण इन्हें इतिहास की गहरी समझ थी।
महिपाल को कभी भी अभिनेता बनने में रुचि नहीं थी लेकिन जब कॉलेज के दिनों में थिएटर से जुड़े तो महिपाल अपनी कला से लोगों का दिल जीत लिया करते थे। कॉलेज के दिनों में महिपाल की लिखी ‘किसान’ कविता इतनी फेमस हुई कि लोग इन्हें अपने प्रोग्राम में यही कविता पढ़ने बुलाने लगे।