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नालों पर आवासीय निर्माण, चल रही व्यावसायिक गतिविधियां

बीकानेर. शहर के गंदे पानी और कचरे को बाहर लेकर जाने वाले नाले भी अतिक्रमणों की जद में है। कई नालों के ऊपर तथा नालों के कैचमेंट एरिया में जगह-जगह आवासीय निर्माण हो चुके है। कई स्थानों पर नालों के ऊपर ही व्यावसायिक गतिविधियां संचालित हो रही है। अतिक्रमणों के कारण न नालों की पूरी सफाई हो पा रही है व कई स्थानों पर सफाई के संसाधन भी नालों तक नहीं पहुंच पा रहे है। नगर निगम और नगर विकास न्यास नालों पर हो चुके अतिक्रमणों को हटाने तथा लगातार हो रहे अतिक्रमणों को रोकने में गंभीरता नहीं दिखा रहे है। कठोर कार्यवाही नहीं होने से मुख्य नालों के ऊपर तथा आस पास की भूमि पर लगातार अतिक्रमण होते जा रहे है।

सफाई कार्य में बाधा
नालों के ऊपर अथवा आस -पास की जमीन पर आवासीय निर्माण होने तथा व्यावसायिक गतिविधियां संचालित होने से नाला सफाई का कार्य प्रभावित हो रहा है। निगम प्रशासन हर साल मानसून से पहले नाला सफाई कार्य करवाता है, लेकिन जिन नालों के ऊपर व पास में अतिक्रमण हो चुके है, उनकी उचित तरीके से सफाई नहीं हो पा रही है। सफाई की मशीनें भी नाले तक नहीं पहुंच पा रही है। महज खानापूर्ति के तहत नाला सफाई कार्य सम्पन्न हो रहा है। जिसका खमियाजा बारिश के दौरान लोगों को भुगतना पड़ता है जब जाम नालों के कारण बारिश का पानी कई क्षेत्रों में एकत्र हो जाता है।

सडक़ मार्ग ने बढ़ाए अतिक्रमण
जिन नालों को कवर करने के बाद उन पर सीसी सडक़ों का निर्माण कर दिया गया है, इससे अतिक्रमणों की संख्या लगातार बढ़ रही है। नालों के ऊपर सडक़ मार्ग पर कई तरह की व्यावसायिक गतिविधियां चल रही है। पार्किंग स्थल बन चुके है। ठेले गाड़े व दुकानें संचालित हो रही है। मकानों की चौकिया, सीढिय़ा और वाहन रखने के स्थल बना दिए गए है।

न नाले सुरक्षित ना कैचमेंट एरिया
शहर में आवासीय क्षेत्रों से होकर निकल रहे कई नालों पर जगह-जगह मकान बन चुके है। कैचमेंट एरिया पर भी निर्माण कार्य हो चुके है। मकानों की चौकिया, रैम्प,शौचालय, वाहन रखने के स्थल नालों के ऊपर व आस पास की जमीन पर बन चुके है। नालों को लेकर निगम और न्यास प्रशासन की उदासीनता के कारण लोग बेखौफ होकर नालों के ऊपर व आस पास अतिक्रमण करने में जुटे हुए है। हर साल मानसून के दौरान अतिक्रमण के चलते नालों की सफाई कार्य में बाधा उत्पन्न होती रहती है।

धूल फांक रही शिकायतें
नालों के ऊपर तथा आस पास हो रहे अतिक्रमणों को लेकर जागरूक लोगों और जनप्रतिनिधियों की ओर से संबंधित विभागों में सूचना देकर कार्यवाही की मांग की जाती रही है। अतिक्रमण रोकने अथवा हटाने की बजाय पत्रावलि सरकार प्रक्रिया के तहत घूमती रहती है। शिकायतकर्ता भी थक हार कर बैठ जाता है। अतिक्रमण हटाने के लिए आवश्यक सरकारी प्रक्रिया भी तुरंत अतिक्रमण हटाने में बाधक बन रही है।

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