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पंचों ने पूरे गांव को समाज से निकाला:अब समाज में केवल पंचों के परिवार ही बचे, मृत्युभोज का किया था विरोध, वापस समाज में लेने के लिए दो लाख रुपए मांगे

जालोर

जालोर जिले में आहोर तहसील के पावटा गांव में पंच-पटेलों ने गांव के 250 परिवार को समाज से बहिष्कृत कर दिया। मेहवाल समाज के इन लोगों ने मृत्युभोज का विरोध किया था। हैरानी की बात यह है कि हजार के करीब आबादी वाले गांव में मेहवाल समाज के 250 घर हैं, इन सभी को समाज से निकाल दिया गया है। अब समाज में गांव के पंच ही बचे हैं। पंचों ने सभी वापस समाज में लेने के लिए दो लाख रुपए और पंचों के परिवारों को भोज देने की शर्त रखी है।

पंच-पटेलों के फैसला सुनाने के बाद ग्रामीण पहले 3 महीने तक तो पंचों से ही गुहार लगाते रहे, लेकिन जब बात नहीं बनी तो उन्होंने कानून की शरण ली। यहां भी उनकी कोई सुनवाई नहीं हुई है। पिछले 9 महीने से समाज से बहिष्कृत इस गांव के लोग पुलिस और प्रशासन के चक्कर लगा रहे हैं। ग्रामीणों ने पुलिस को अनशन की धमकी दी है।

नया खेड़ा गांव निवासी नरसाराम मेघवाल करीब 30 साल पहले लापता हो गया था। नरसाराम के बारे में आज तक कोई जानकारी नहीं मिली है। उसकी पत्नी की नवंबर 2020 में मौत हो गई थी। इस पर नरसाराम के बेटे अचलाराम ने उसकी मां की अस्थियों को पुष्कर ले जाने की मंशा जताई। इस दौरान मेघवाल समाज के पंचों ने कहा कि उसके पिता नरसाराम का 30 सालों से कोई अता पता नहीं है। ऐसे में पहले नरसाराम का मृत्यु भोज करना होगा। इसके बाद ही उसकी मां की अस्थियों को पुष्कर ले जा सकेगा। पंचों के फैसले के बाद अचलाराम ने अपने गुमशुदा पिता का मृत्यु भोज किया। फिर दोनों बेटे मां की अस्थियों को पुष्कर लेकर गए।

पावटा गांव के लोगों ने विरोध किया तो समाज से निकाल दिया
नरसाराम मेघवाल के दो बेटे हैं। बड़ा बेटा अचलाराम मजदूरी कर अपने परिवार का पालन पोषण कर रहा है, जबकि चंपाराम का मानसिक संतुलन ठीक नहीं है। इसके बाद भी पंचों ने रुपए खर्च करवाकर गुमशुदा पिता और मां की मौत पर दो बार मृत्यु भोज करवा दिया। जब पावटा गांव के लोगों ने विरोध किया तो पंचों ने मेघवाल समाज के सभी 250 घरों को बहिष्कृत कर दिया। पिछले 9 महीनों से इस गांव के मेघवाल समाज के लोग समाज से बहिष्कृत हैं। ऐसे में इस गांव की बहन-बेटियां उनके परिवार के किसी शादी या त्योहार पर गांव नहीं आ पाती हैं। रिश्तेदार भी इस गांव में नहीं आते हैं।

कोर्ट के जरिए हुआ था मुकदमा दर्ज
ग्रामीणों ने 8 मार्च 2021 को जालोर एसपी को रिपोर्ट देकर मामला दर्ज करवाने की मांग की थी। इसके बाद एसपी ने आहोर थाने को रिपोर्ट दर्ज कर जांच के आदेश दिए थे, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। परिवादी नारायणलाल पुत्र लक्ष्मणाराम ने 17 जुलाई 2021 में अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष इस्तगासा पेश कर मामला दर्ज करवाया था। पंच रसियावास निवासी कानाराम, सेदरिया बालोतान निवासी समाराम, रसियावास निवासी हंजाराम, पलासिया निवासी सवाराम, सुगालिया बालोतान निवासी पदमाराम, हरियाली निवासी शंकरलाल, वेदाना निवासी तलसाराम, उम्मेदपुर निवासी ताराराम, हरियाली निवासी लक्ष्मणाराम, नया खेड़ा (सुमेरपुर) निवासी कानाराम, तखतगढ़ निवासी गणेशाराम, तखतगढ़ निवासी केसाराम ने नया खेड़ा निवासी नरसाराम मेघवाल की पत्नी की मृत्यु पर होने वाले मृत्युभोज नहीं करने की बात कहने पर 250 घरों को समाज से बहिष्कृत कर दिया है।

ग्रामीणों ने दी आमरण अनशन की चेतावनी
पावटा गांव के ग्रामीणों ने मंगलवार को एसपी को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन दिया, जिसमें बताया कि पंचों के खिलाफ 17 जुलाई 2021 को मुकदमा दर्ज करवाया था, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। उन्होंने चेतावनी दी कि 7 दिन में पंचों के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई तो पावटा गांव के मेघवाल समाज के सभी लोग आमरण अनशन पर बैठेंगे। इसकी जिम्मेदारी पुलिस व प्रशासन की होगी।

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