अलवर
18 से अधिक DSP व थानेदारों के इलाज का दावा करने वाला झोलाछाप डॉक्टर पूरे कुनबे के साथ फरार हो गया। भास्कर डिजिटल के खुलासे के बाद झोलाछाप ने अलवर छोड़ दिया है। खबर देख अधिकारी एक्टिव हो गए थे। फिर भी झोलाछाप पकड़ में नहीं आया। अलवर शहर में टेल्को चौराहे के पास कई झोलाछाप परिवार रह रहे थे। उनके पास चार बसें व तीन-चार कारें भी थीं। इन्हीं वाहनों में अपना सामान भरकर चले गए।

अलवर शहर में टेल्को चौराहे के पास 2 दिन पहले झोलाछाप का ठिकाना।

भास्कर ऐप पर खबर चलने के बाद झोलाछाप टेल्को चौराहे से सामान समेटकर निकल गया।
इलाज के साथ ताकत की दवा का दावा
अलवर में एक झोलाछाप डॉक्टर ने भास्कर के स्टिंग ऑपरेशन में बाकायदा कहा कि उसने DSP व थानेदारों का इलाज किया है। ताकत की दवा भी दी है। उनसे केवल पेट का इलाज कराने का लिखित में लिया है। झोलाछाप बोला कि ताकत की दवा भी लेते हैं, लेकिन लिखकर तो पेट की दवा बताते हैं। अधिकारी के हस्ताक्षर व मुहर तक हैं। ऐसे पुलिस अफसरों का एल्बम बना रखा था।

इस तरह पुलिस के अफसरों के साथ झोलाछाप डॉक्टर के फोटो थे। इसके जरिए वो दावा करता था कि इनका इलाज किया है। ताकत की दवा भी दी।
अलवर के ये अफसर
भास्कर ने स्टिंग किया तो पूरी पोल खुल गई। भास्कर संवाददाता झोलाछाप डॉक्टर सतपाल की दुकान व ठिकाने दोनों जगह पहुंचा। स्टिंग ऑपरेशन के दौरान उसने बताया कि अलवर में रामगढ़ के DSP ओमप्रकाश मीणा, नीमराणा के DSP महावीर सिंह शेखावत, सदर थानाधिकारी महेश शर्मा व शिवाजी पार्क के पुलिस अफसर को दवा दे चुके हैं। इन अफसरों के बारे में सीधे तौर पर यह नहीं कहा कि इनको किस रोग से जुड़ी दवाएं दी हैं।
अलवर के बाहर के ये अफसर
प्रतापगढ़ में 2016 में CI रहे मांगी लाल विश्नोई, 2018 में सोजत सिटी के थाना प्रभारी राजेंद्र सिंह हों या 2018 में आबू रोड सदर थाना प्रभारी जैसे करीब एक दर्जन से अधिक पुलिस अफसर खानदानी झोलाछाप से इलाज करा रहे हैं। झोलाछाप डॉक्टर ने जानकारी देते हुए यह भी कहा था कि पेट का इलाज लिखकर देते हैं, लेकिन असल में गुप्त रोगों का इलाज कराने वाले ज्यादा हैं।
डायबिटीज व कैंसर के इलाज का भी दावा
झोलाछाप ने कैमरे के सामने यह भी दावा किया कि उसके पास 90 प्रतिशत शक्तिवर्धक दवा लेने वाले आते हैं। वैसे पेट की तकलीफ वाले भी आते हैं। डायबिटीज व कैंसर तक की दवा देने का दावा किया। कहा कि एक बार दवा लेकर देख लो। महीने का 800 से 1 हजार रुपए का दवा खर्च बताया। हर मर्ज की दवा का इलाज का खर्च अलग-अलग है।