कोरोना से रिकवर होने वाले मरीजों में हेयरफॉल के मामले बढ़ रहे हैं। दूसरी लहर में वायरस को मात देने वाले लोगों में स्किन एलर्जी, रैशेज, कमजोरी, थकान, ड्राय आइस के बाद अब बालों के टूटने के लक्षण भी दिख रहे हैं।
एक्सपर्ट का कहना है, ऐसे मरीजों में रिकवरी के 30 दिन बाद बालों में कमी आ रही है। वहीं, कुछ मरीजों में कोविड के दौरान भी ऐसे मामले सामने आए थे। कुछ मरीजों के खानपान में पोषक तत्वों की कमी, बुखार, तनाव, बेचैनी और हार्मोन में बदलाव भी हेयरफॉल की वजह हो सकती है।
इंद्रप्रस्थ अपोलो हॉस्पिटल में सीनियर कॉस्मेटिक एंड प्लास्टिक सर्जन डॉ. शाहीन नूरेएजदान कहती हैं, ऐसे मरीजों की संख्या में दोगुनी हो गई है। इसकी वजह पोस्ट कोविड इंफ्लेमेशन है। वजन में बदलाव, विटामिन-डी और बी-12 की कमी इसकी बड़ी वजह हो सकती है।
डाइट में प्रोटीन जरूर लें
सीनियर कॉस्मेटिक एंड प्लास्टिक सर्जन डॉ. कुलदीप सिंह कहते हैं, इस तरह का हेयरफॉल टेम्प्रेरी होता है। इस स्थिति को टेलोजेन इफ्लूवियम कहते हैं। आमतौर पर इंसान के एक दिन में 100 बाल टूटते हैं, लेकिन इस स्थिति में रोजाना 300 से 400 बाल टूटते हैं। इसलिए कोरोना को मात देने के बाद मरीजों को पोषक तत्वों से युक्त डाइट लेने की सलाह दी जाती है। डाइट में खासतौर पर प्रोटीन की मात्रा बढ़ाएं।
5 से 6 हफ्ते लगातार हेयरफॉल हो तो सलाह लें
डॉ. कुलदीप सिंह के मुताबिक, अगर 5 से 6 हफ्ते तक ऐसा लगातार होता है तो डॉक्टर से मिलें। ऐसी स्थिति में मरीज को माइल्ड शैंपू से बाल धोने की सलाह दी जाती है। मरीज की स्थिति के मुताबिक ऑयल से मसाज करने के साथ चौड़े दांत वाले कंघे के बालों को संवारें।
हेयरफॉल रोकने के लिए इन बातों का ध्यान रखें
- तनाव लेने से बचें और रोजाना मेडिटेशन की आदत डालें।
- प्रोटीन, विटामिन-डी और बी-12 युक्त खानपान डाइट में शामिल करें।
- हेयर स्टाइलिंग के लिए केमिकल और हीट का इस्तेमाल करने से बचें।
- अगर समस्या फिर भी जारी रहे तो ब्लड टेस्ट कराकर पोषक तत्वों की जांच कराएं।