सीमा सन्देश न्यूज
श्रीगंगानगर। सरकार द्वारा जिन सरकारी भूखण्डों को सुरक्षा के लिहाज से असुरक्षित/जर्जर घोषित किया गया है। उन्ही भवनों में कर्मचारी रहने को मजबूर है। कई भवन ऐसे भी है, जिन्हे असुरक्षित घोषित नहीं किया गया परन्तु उनकी दीवरों में दरारें आ चुकी है। कुछ ऐसे भी हैं जिनकी छत्तों से बरसात के दिनों में पानी टपकता है। इधर जिला कल्क्टरेट परिसर में ही कई भवनों/कमरों में संचालित हो रहे कार्यालयों की छतों से प्लास्टर तक गिर चुका है। पिछले दिनों ही नगरपरिषद के सभागार उपर बने कमरे का छज्जा गिर गया था। गनीमत रही इस दौरान कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ। एक ओर जहां लोग जर्जर भवनों में रहने को मजबूर हैं वहीं नगरपरिषद की वाटरवर्क्स कॉलोनी में तो करीब दो बीघा भूमि पर लोगों ने कब्जा ही कर रखा है। जिसे हटाने के लिए नगरपरिषद हर बार नौटंकी करती है परन्तु आजतक इन्हें बेदखल करने के लिए कोई ठोस इंतजाम नहीं किए गए।
जानकारी अनुसार वाटर वर्क्स कॉलोनी में कुछ भूखण्ड तो ऐसे भी है, जिन्हे सरकारी कर्मचारियों को अलॉट किए गए थे। परन्तु इनमें से एक-दो कर्मचारियों ने यह भूखण्ड निजी लोगों तक को बेच दिए। तत्कालीन आयुक्त सुनीता चौधरी के कार्यकाल में मामले हुई जांच के दौरान यह मामला सामने आया था। इसके बाद इसमें कार्यवाही भी शुरू की गई परन्तु बाद में इसे रोक दिया गया।