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बढ़ते टीकाकरण का पॉजिटिव असर:अगस्त में सर्विसेज सेक्टर की ग्रोथ साढ़े तीन साल में सबसे ज्यादा, पिछले महीने जारी रही छंटनी लेकिन रफ्तार में आई कमी

नई दिल्ली

कोविड पर रोकथाम के लिए बढ़ते टीकाकरण ने अगस्त में सर्विसेज सेक्टर पर पूरा असर दिखाया। GDP में लगभग 55% का योगदान करने वाले इस सेक्टर की ग्रोथ डेढ़ साल में सबसे ज्यादा रही। IHS मार्किट का पर्चेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (PMI) अगस्त में 56.7 पर पहुंच गया जो जुलाई में 45.4 था। PMI का 50 से ऊपर रहना बताता है कि बिजनेस एक्टिविटी बढ़ी है, जबकि इंडेक्स का उससे नीचे रहने का मतलब एक्टिविटी में कमी आना होता है।

सर्विस सेक्टर में चार महीने के बाद पॉजिटिव ग्रोथ

IHS मार्किट के पर्चेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स सर्वे के मुताबिक, अगस्त में सर्विस सेक्टर ने चार महीने के बाद ग्रोथ का मुंह देखा है। यह बाजारों के दोबारा खुलने पर बड़ी संख्या में लोगों के घरों से निकलने के अलावा कंपनियों के कामयाब ऐड कैंपेन की वजह से हुआ है। हालांकि, इस सेक्टर की कंपनियों ने पिछले महीने भी छंटनी जारी रखी, लेकिन उसकी रफ्तार घटी। सर्वे में शामिल कंपनियों ने बताया कि उनके पास बढ़ते ऑर्डर पूरा करने के लिए पर्याप्त लोग हैं।

ट्रेंड जारी रहा तो दूसरी तिमाही में ग्रोथ होगी तेज

अगर ग्रोथ का यह ट्रेंड सितंबर में भी जारी रहा तो इस वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में सर्विसेज सेक्टर की ग्रोथ को काफी बढ़ावा मिलेगा। पहली तिमाही में सर्विसेज सेक्टर की ग्रोथ 11.4% रही थी, जबकि लो बेस इफेक्ट के चलते इस दौरान GDP ग्रोथ 21.5% रही। लेकिन, दोनों आंकड़ों की तुलना नहीं जा सकती क्योंकि PMI का कैलकुलेशन मासिक जबकि GDP की सालाना आधार पर होता है। सर्विसेज सेक्टर ने ग्रोथ के मोर्चे पर मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को तीन साल में पहली बार पछाड़ा है।

सर्विस सेक्टर की कंपनियों ने वर्कफोर्स घटाया

सर्वे में शामिल कंपनियों ने बताया कि बड़े पैमाने पर ऑर्डर आ रहे हैं और नए ऑर्डर की संभावनाएं भी बढ़ी हैं। घरेलू बाजार में बनी मांग की स्थिति ऑर्डर बढ़ने के संकेत दे रहे हैं लेकिन विदेशी बाजारों से मिलने वाले ऑर्डर में तेज गिरावट आई है। इसकी वजह कोविड के चलते विदेश में आई सुस्ती और विदेश यात्रा पर लगी पाबंदियां हैं। इस बीच सर्विस सेक्टर की कंपनियों ने अगस्त में वर्कफोर्स घटाया है। उनका कहना है कि उनके पास बड़ी डिमांड पूरी करने लायक लोग पर्याप्त संख्या में हैं।

ज्यादा फ्यूल, रिटेल और ट्रांसपोर्ट कॉस्ट से बढ़ा खर्च

सर्विस सेक्टर की कंपनियों का कहना है कि अगस्त में फ्यूल, रिटेल और ट्रांसपोर्ट कॉस्ट बढ़ने से उनका खर्च बढ़ा है। उनकी इनपुट कॉस्ट चार महीने में सबसे ज्यादा बढ़ी है और लॉन्ग टर्म एवरेज से ज्यादा हो गई है। उसलिए उन्होंने अगस्त में अपने चार्ज भी बढ़ाए। यह तब हुआ जब महंगाई दर मार्च के बाद सबसे निचले स्तर पर आ गई है और उसमें मामूली बढ़ोतरी रही है।

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