मुंबई
वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने आसान बैंकिंग का चौथा चरण आज लॉन्च किया। इसे ईज-4 नाम दिया गया है। ईज का मतलब एन्हांस्ड एक्सेस एंड सर्विस एक्सीलेंस से है। यह सरकारी बैंकों के लिए एक कॉमन रिफॉर्म एजेंडा है। इसका मकसद स्पष्ट और स्मार्ट बैंकिंग सेवा देने का है। इसमें 6 थीम में 26 पॉइंट को शामिल किया गया है।
उत्तर-पूर्व भारत पर फोकस करें बैंक
वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा है कि बैंकों को उत्तर पूर्व भारत में फोकस करना चाहिए। यहां पर चालू एवं बचत खाता (कासा) डिपॉजिट बढ़ रही है। इसलिए बैंकों को इन क्षेत्रों में उधारी को भी बढ़ाना चाहिए। इससे बैंकों को लाभ होगा।
उत्तर पूर्व भारत के लिए योजना बनाएं बैंक
उन्होंने कहा कि उत्तर पूर्व भारत के लिए विशेष योजना बैंक बनाएं। इसमें लॉजिस्टिक्स, इंपोर्ट पर फोकस किया जाएगा। पूर्वी भारत में ओड़िशा, बिहार, पश्चिम बंगाल में कासा डिपॉजिट बढ़ रहा है। इसलिए बैंकों को इन इलाकों में क्रेडिट को बढ़ाना चाहिए। यानी ज्यादा उधारी देना चाहिए। उन्होंने कहा कि दक्षिण भारत और पश्चिमी भारत की तर्ज पर पूर्वी भारत में बैंक उधारी नहीं दे पा रहे हैं।
उधारी में तेजी नहीं आ रही है, यह कहना जल्दबाजी
वित्तमंत्री ने कहा कि बैंकों की उधारी में अभी तेजी नहीं आ रही है, यह कहना काफी जल्दबाजी होगी। उन्होंने कहा कि खाने के तेल और दालों पर ड्यूटी को कम किया गया है। ईज 4 में 6 थीम पर कुल 26 एक्शन पॉइंट्स हैं। इसमें मुख्य पॉइंट्स में 24 घंटे सातों दिन बैंकिंग सेवा, सरकारी बैंकों के साथ कोलैबरेशन, किसानों को आसानी से उधारी मिले, ग्रामीण पंचायत के साथ अन्य सेवाएं हैं।
6 थीम पर होता है फोकस
ईज रिफॉर्म के तहत मूल रूप से 6 थीम पर फोकस किया जाता है। इसमें जिम्मेदार बैंकिंग, क्रेडिट ऑफ टेक, उद्यमी मित्र, वित्तीय साक्षरता, डिजिटलाइजेशन और ब्रांड डेवलपिंग आदि हैं। इसका पूरा एजेंडा रिस्पांसिव और रिस्पांसिबल का होता है। ईज बैंकिंग का पहला चरण जनवरी 2018 में लॉन्च किया गया था। इसके तहत ग्राहकों को कॉल सेंटर, वेब पोर्टल, मोबाइल ऐप और टच पॉइंट्स के जरिए उनके दरवाजे तक बैंकिंग सेवाओं की सुविधा दी जाती है।
इसके तहत ग्राहक अपनी रिक्वेस्ट को भी ट्रैक कर सकते हैं। हालांकि यह सेवा बैंकों के चुनिंदा केंद्रों पर ही उपलब्ध होती है।
बैंक इसके लिए एजेंट्स रखते हैं
बैंक इसके लिए एजेंट्स रखते हैं जो ग्राहकों तक पहुंचते हैं। शुरुआती चरण में ईज रिफॉर्म के तहत चेक, डिमांड ड्राफ्ट, पे ऑर्डर को लाना और ले जाना, नई चेकबुक के लिए एप्लिकेशन लेना, 15G जी और 15H फॉर्म को कलेक्ट करना, अकाउंट का स्टेटमेंट देना, चेकबुक की डिलीवरी करने जैसी सुविधाएं इसमें मिलती हैं। दरअसल इसके तहत ग्राहक चुनिंदा सेवाओं को अपने घर पर मंगा सकता है।
बैंक सुविधाओं के लिए चार्ज लेते हैं
बैंक इसके लिए चार्ज भी लेते हैं। इस चार्ज में GST लगता है। यह चार्ज बैंक की शाखा से ग्राहक के घर की दूरी के आधार पर लगता है। इन सेवाओं को लॉन्च करने का मकसद वरिष्ठ और दिव्यांग नागरिकों को सुविधा देना है। ईज रिफॉर्म पर बैंकों को स्कोर मिलते हैं। उदाहरण के तौर पर ईज के दूसरे चरण में मार्च 2019 से मार्च 2020 के दौरान सरकारी बैंकों का स्कोर 37% बढ़ा था। बैंकों को 67.4% स्कोर मिला था। इसमें सबसे बेहतर काम जिम्मेदार बैंकिंग में किया गया। जिम्मेदार बैंकिंग में मार्च 2020 में 69.9% स्कोर मिला था। मार्च 2019 में यह स्कोर 44.9% था।
SBI और बैंक ऑफ बड़ौदा सबसे आगे
ईज-2 में सभी सेवाओं में बैंक ऑफ बड़ौदा और भारतीय स्टेट बैंक (SBI) सबसे आगे रहे। सरकारी बैंकों ने 59 मिनट में लोन देने के लिए PSBloansin59minutes.com की शुरुआत की थी। यह भी ईज रिफॉर्म में ही शामिल किया गया। बैंकों की कोशिश है कि शाखा आधारित ज्यादातर सेवाएं ग्राहकों के घर तक पहुंचे। यह सेवाएं ग्राहकों की भाषा में मिलती हैं।
ईज-3 को 2020-21 के लिए लॉन्च किया गया था
ईज-3 को 2020-21 के लिए लॉन्च किया गया था। ईज में डायल अ लोन की सुविधा दी गई। इसमें रिटेल और छोटे एवं मध्यम उद्योगों को डिजिटल तरीके से लोन की सुविधा दी गई। इसके साथ ही फिनटेक और ई-कॉमर्स कंपनियों के साथ बैंकों ने भागीदारी की। इसी तरह से जहां पर हमेशा ज्यादा लोगों की आवाजाही होती है, वहां पर बैंकिंग कियॉस्क लगाने की योजना शुरू की गई। ऐसी जगहों में ट्रेन स्टेशन, बस स्टैंड, मॉल, हॉस्पिटल आदि को शामिल किया गया। इन जगहों पर पेपरलेस और डिजिटल तरीके से सेवा मिलती है।
शिकायतों का समय घट गया
बैंकों ने ईज-3 में शिकायतों को दूर करने के लिए औसतन 5 दिन का समय लिया, जो पहले 9 दिन हुआ करता था। इसी तरह रिटेल लोन देने का समय 30 दिन से घट कर 10 दिन रह गया है। सरकारी बैंक 30 से ज्यादा सेवाएं इस समय डिजिटल तरीके से दे रहे हैं। करीबन 5 करोड़ ग्राहक मोबाइल और इंटरनेट बैंकिंग से काम करते हैं। बैंकों के कॉल सेंटर 15 भाषाओं में काम करते हैं।