नई दिल्ली। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को कहा कि भारत ने 1,000 साल तक अपनी संस्कृति, भाषा और धर्म के लिए लड़ाई लड़ी, जो व्यर्थ नहीं गई। उन्होंने कहा कि इस लड़ाई के दौरान कुर्बानियां देने वालों की आत्मा को आज भारत का पुनरुत्थान देखकर शांति मिलती होगी। अमित शाह ने दिल्ली में महाराणा: सहस्र वर्षों का धर्मयुद्ध पुस्तक का विमोचन करने के बाद अपने संबोधन में यह बात कही। इस अवसर पर उन्होंने मौजूदा लेखकों व इतिहासकारों का आह्वान किया कि वे इतिहास पर टीका-टिप्पणी छोड़कर देश के गौरवशाली इतिहास को संदर्भ ग्रंथ के रूप में जनता के सामने रखें।
शाह ने इस दिशा में अनेक लोगों के प्रयास करने की जरूरत पर बल दिया और कहा कि यह पुस्तक एक शुरूआत है। उन्होंने कहा कि बाजीराव पेशवा ने अटक से कटक तक भगवा फहराने का काम किया था, लेकिन इस प्रकार के कई ऐसे व्यक्तित्व रहे हैं जिनके जीवन को भी न्याय नहीं मिला। गृह मंत्री ने कहा, ह्यहमें इस दिशा में भी काम करना चाहिए। हमारे साम्राज्यों के बारे में काम करना चाहिए। शाह ने कहा कि स्वतंत्रता सेनानी वीर सावरकर नहीं होते तो 1857 का सत्य छिपा रह जाता। उन्होंने कहा, इतिहास को फौरी तौर पर देखने वाले देखते हैं कि इस युद्ध में कौन जीता कौन हारा। मगर उनको मालूम नहीं कि हारकर भी विजेता होने वाले लोगों के इतिहास से ही यह देश बना है। हार गए, मगर विजेता बने। सालों-साल लड़ाइयां लड़ीं। 1857 की क्रांति के बारे में भी हम कह सकते हैं कि हम हार गए थे। परंतु उनको मालूम नहीं कि उस क्रांति ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था।
कुबार्नी देने वालों की आत्मा को मिलती होगी शांति
उन्होंने कहा, ह्यहार और जीत के कारण इतिहास नहीं लिखा जाता बल्कि वह घटना देश व समाज पर क्या परिणाम छोड़ती है, उससे इतिहास बनता है।’ उन्होंने कहा कि आज भारत का पुनरुत्थान देखकर देश के लिए लड़ाई लड़ने वाले और कुबार्नी देने वालों की आत्मा को शांति मिलती होगी। शाह ने कहा, फिर से गौरव के साथ दुनिया के सामने खड़े होने का अवसर आ गया है… देश खड़ा हो रहा है। यह सरकारों से नहीं होता है। समाज जीवन में जब जागृति की चिंगारी फैलती है, वह आग में बदलती है तभी जाकर परिवर्तन आता है। तभी समाज का गौरव जागरूक होता है। उन्होंने कहा, सालों बाद हमारी संस्कृति को दुनिया भर में स्वीकृति मिली है। इस प्रकार की स्थिति हम देख रहे हैं।’