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महिलाओं को अलर्ट करने वाली रिसर्च:मोटापे से परेशान गर्भवती महिलाओें के बच्चों में मानसिक रोग होने का खतरा 60 फीसदी तक ज्यादा, फिनलैंड के शोधकर्ताओं का दावा

मोटापे से परेशान गर्भवती महिलाओं के बच्चों को 60 फीसदी तक मानसिक रोग होने का खतरा रहता है। 1950 से 1999 के बीच 68,571 बच्चे और मां पर हुई रिसर्च में यह बात सामने आई है।

रिसर्च करने वाली फिनलैंड की हेल्सिंकी यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं का कहना है, 1975 से 1999 के बीच ओवरवेट महिलाओं ने बच्चों को जन्म दिया। जब ये बच्चे वयस्क बने तो इनमें से 60 फीसदी में सिजोफ्रेनिया जैसी मानसिक बीमारियां देखी गईं।

सिर्फ ओवरवेट ही नहीं अंडरवेट महिलाओं के बच्चों में भी ऐसा देखा गया। ऐसी अंडरवेट महिलाएं जिनका प्रेग्नेंसी के दौरान बॉडी मास इंडेक्स 18.5 से कम था, उनके बच्चों में मेंटल डिसऑर्डर होने का खतरा 74 फीसदी तक था।

हेल्सिंकी यूनिवर्सिटी की सायकोलॉजिस्ट मारियस लाहटी का कहना है, रिसर्च के दौरान हमें बीएमआई, प्रेग्नेंसी और उनके बच्चों को होने वाली मानसिक बीमारी के बीच एक कनेक्शन मिला। गर्भवती में बढ़ते ओवरवेट के मामले चिंता का विषय हैं।

पिछले कुछ सालों में गर्भवती महिलाओं में मोटापे के मामले बढ़ रहे हैं। इसे कंट्रोल करने के लिए ब्रिटेन में सरकार ने एंटी-ओबेसिटी स्ट्रेटेजी लागू की है। नए नियम के तहत 9 बजे से पहले अनहेल्दी फूड खाने पर बैन लगा दिया गया है। इस पहल का लक्ष्य लोगों को हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाने के लिए प्रेरित करना था। इतना ही नहीं, हेल्दी फूड खाने और एक्सरसाइज करने वाले परिवारों के लिए रिवॉर्ड का इंतजाम भी किया गया।

मोटापे से जुड़ी 5 बातें आपको जरूरत मालूम होनी चाहिए

1. सिर्फ वजन का बढ़ना मोटापा नहीं

मुम्बई के जसलोक हॉस्पिटल के कंसल्टेंट बेरियाट्रिक सर्जन डॉ. संजय बोरूडे के मुताबिक, मोटापा कितना है यह तीन तरह से जांचा जाता है। पहले तरीके में शरीर का फैट, मसल्स, हड्डी और बॉडी में मौजूद पानी का वजन जांचा जाता है। दूसरा है बॉडी मास इंडेक्स। तीसरी जांच में कूल्हे और कमर का अनुपात देखा जाता है। ये जांच बताती हैं आप वाकई में मोटे है या नहीं।

2. यह बीमारियों की नींव है

आम भाषा में कहें तो मोटापा ज्यादातर बीमारियों की नींव है। डायबिटीज, ब्लड प्रेशर, जॉइंट पेन और कैंसर तक की वजह चर्बी है। फैट जब बढ़ता है तो शरीर के हर हिस्से में बढ़ता है। चर्बी से निकलने वाले हार्मोन नुकसान पहुंचाते हैं इसलिए शरीर का हर हिस्सा इससे प्रभावित होता है। जैसे- पेन्क्रियाज का फैट डायबिटीज, किडनी का फैट ब्लड प्रेशर, हार्ट से आसपास जमा चर्बी हदय रोगों की वजह बनती है।

3. दो तरह से बढ़ता है मोटापा

मोटापा दो वजहों से बढ़ता है। पहला आनुवांशिक यानी फैमिली हिस्ट्री से मिलने वाला मोटापा। दूसरा, बाहरी कारणों से बढ़ने वाला मोटापा। जैसे ऐसी चीजें ज्यादा खाना जो तला हुआ या अधिक कैलोरी वाला है। जैसे फास्ट और जंक फूड। सिटिंग जॉब वालों में मोटापे का कारण कैलोरी का बर्न न होना है।

4. इसे घटाने का आसान तरीका समझें

रोजाना 30 मिनट की वॉक, सीढ़ी चढ़ना, रात का खाना हल्का लेना और घर के कामों को करके भी मोटापा आसानी से नियंत्रित किया जा सकता है। यह इसलिए भी जरूरी है क्योंकि यह शरीर के साथ दिमाग के लिए भी नुकसानदेह है।

5. थोड़ा बदलाव में खानपान में करें

नाश्ते में अंकुरित अनाज यानी मूंग, चना और सोयाबीन को अंकुरित खाएं। ऐसा करने से उनमें मौजूद पोषक तत्‍वों की मात्रा बढ़ती है। मौसमी हरी सब्जियों को डाइट में शामिल करें। अधिक फैट वाला दूध, बटर तथा पनीर लेने से बचें।

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