बीकानेर. कोरोना काल में अभी पर्यटन की दृष्टि से विदेशी सैलानी तो भारत नहीं आ रहे हैं लेकिन विदेशी परिंदों में एेसी कोई समस्या नहीं है। ये परिंदें यहां मानसून की दस्तक के साथ ही आना शुरू हो गए हैं। जोड़बीड़ क्षेत्र जहां सर्दियों में भी भिन्न-भिन्न प्रजातियों के परिंदों की चहल पहल रहती है वहीं वर्षा काल में भी कुछ देशों के पक्षी यहां आते हैं। इस बार भी बरसात शुरू होने के साथ ही ये पक्षी दिखाई देने लगे हैं।
यह कुछ दिनों से काफी संख्या में दिखाई देने लगे हैं। इनमें व्हाइट आई बजर्ड, ब्ल्यू चिक बी ईटर, वूली नेक स्ट्रॉक, शेलर आदि प्रमुख हैं। इस संबंध में बीकानेर बर्ड क्लब के अध्यक्ष डॉ.जितेन्द्र सिंह सोलंकी ने बताया कि विदेशी मेहमान मध्य एशिया के देशों से प्रवास में आते हैं। मुख्य रूप से शिकारी पक्षी है। इनमें कोईं जलीय परिंदा नहीं हैं। जोड़बीड़ में बारिश के दिनों में कीड़े-मकौड़े, छिपकली, कीट पतंगों की भरमार हो जाती है। यही इनका मुख्य भोजन है। इसके साथ थोड़ी गर्मी भी कम होने से इन पक्षियों के लिए वातावरण अनुकूल बन जाता है। इन पक्षियों का पूरे वर्षा ऋतु में यहां प्रवास रहता है। इसके बाद ये दक्षिण भारत की तरफ निकल जाते हैं। डूंगर कॉलेज के प्राणीशास्त्र व्याख्याता डॉ प्रताप सिंह ने बताया कि इस बार पक्षी अच्छी तादाद में दिखाई दे रहे हैं। हांलांकि इस बार एक-दो प्रजाति के बर्ड नहीं दिख रहे। पूरे बरसात का सीजन में ये पक्षी राजस्थान के विभिन्न मरुस्थलीय क्षेत्र जैसे तालछापर, बीकानेर और पश्चिमी राजस्थान के कुछ हिस्सों में आते हैं। इसके बाद दक्षिण की तरफ से होते हुए अपने-अपने गंतव्य पर निकल जाते हैं।