नई दिल्ली
कई बार ऐसी स्थिति पैदा हो जाती है कि निवेशक को पॉलिसी बंद करने के बारे में सोचना पड़ता है। इसका कारण कुछ भी हो सकता है, जैसे किसी अन्य पॉलिसी में रुची या फिर प्रीमियम भरने में परेशानी होना। लेकिन क्या आप जानते हैं कि एलआईसी पॉलिसी को बंद कराते समय कई तरह के नियमों का सामना करना होता है? दरअसल, पॉलिसी बंद कराने पर निवेशक को कुछ पैसे मिलते हैं जिसे सरेंडर वैल्यू कहा जाता है। अपनी पॉलिसी बंद कराने से पहले आपके लिए कुछ बातें जानना बेहद जरूरी है। क्या आप जानते हैं कि पॉलिसी बंद करने पर मिलने वाली सरेंडर वैल्यू भी टैक्स के दायरे में आती है? क्या सरेंडर वैल्यू का जिक्र आईटीआर भरते समय किया जा सकता हैं? या फिर, क्या सरेंडर वैल्यू के हिसाब से इनकम टैक्स निवेशक से कर वसूल सकता है? हालांकि, एलआईसी जीवन बीमा पॉलिसी इनकम टैक्स की धारा 80C के तहत कर में छूट का लाभ देता है। साथ ही यदि आपने 31 मार्च 2003 से पहले पॉलिसी ली है तो आपके चुकाए गए प्रीमियम पर 20 फीसदी तक का कर छूट मिल सकता है।