बांसवाड़ा
बांसवाड़ा से करीब 7 किलोमीटर दूर समाई माता पहाड़ी पर पहली बार मोर और मोरनी के दुर्लभ पलों को कैमरे में कैद किया गया है। मोर मोरनी को रिझाने के लिए जतन करता दिख रहा है। ये दुर्लभ नजारा वाइल्ड लाइफ फोटोग्राफर भरत कंसारा ने अपने कैमरे में कैद किया। जिसके लिए वे एक ही जगह पर बैठकर इन फोटो को क्लिक करते रहे। हल्की सी आहट भी इस दुर्लभ नजारे को उनके कैमरे से दूर कर सकती थी। इसलिए सांसों को थामते हुए फोटो खींचते रहे।
दो घंटे की मेहनत के बाद ये अनोखा नजारा उनके कैमरे में कैद हुआ। जिसके लिए 1000 से ज्यादा तस्वीरें खींचनी पड़ीं। तब जाकर कुछ चुनिंदा तस्वीरों में ये नजारा कैद हुआ।

नृत्य करते हुए मोर के पास दाना चुगती मोरनी।
मोर पंख फैलाकर रिझाता है, मोरनी भी इठला कर चलने लगी है
वाइल्ड लाइफ फोटोग्राफर कंसारा ने बताया कि मोरनी को रिझाने के लिए मोर अक्सर पंखों को खोलते हैं। मेटिंग के लिए मोर कई बार गर्दन को झुकाकर मोरनी को रिझाने की कोशिश करता है। मोर के करीब आने वाली मोरनी की चाल भी अक्सर बदल जाती है। कह सकते हैं कि वह थोड़ा इठला कर चलने लगती है।
वाइल्ड लाइफ फोटोग्राफर कंसारा अक्सर पहाड़ियों पर दुर्लभ नजारे कैद करने जाते रहते हैं। उन्होंने जब मोर को इस तरह के संकेत देते देखा तो मौके पर कैमरा लगाया। देखा कि मोर धीरे-धीरे पंखों को उठाते हुए अच्छे से नाचने लगा है। उसके इस नृत्य के दौरान मोरनी उसके ईर्द-गिर्द घूमती है।

नाचते समय पीछे से ऐसा दिखता है मोर।
शर्मिला होता है मोर
मोर का स्वभाव शर्मिला होता है। मेटिंग के दौरान भी मोर का यह शर्मिला स्वभाव देखने को मिलता है। पंख फैलाकर नाचने वाला मोर विशेष मौके पर इन पंखों से खुद को ढक लेता है। देखने में ऐसा लगता है कि मौके पर वह मोर अकेला है, जबकि वह पंखों से मोरनी को भी ढक लेता है।

विशेष मौके पर खुद को पंखों से छिपाता हुआ मोर।
ऐसी हैं कहानियां
सनातन धर्म और धार्मिक ग्रंथ कुरान में भी मोर का जिक्र मिलता है। कहते हैं कि सावन के महीने में मोर बादलों को बरसने के लिए मजबूर करता है। वह नृत्य कर बादलों को रिझाता है। इससे बारिश होती है।
मोर की मेटिंग पर HC के पूर्व जज के बयान से हुआ था विवाद
चार साल पहले पूर्व जस्टिस महेश शर्मा ने रिटायरमेंट के तुरंत बाद बयान दिया था कि मोर मेटिंग नहीं करता है, वह ब्रह्मचारी रहता है। इसीलिए वह राष्ट्रीय पक्षी है। इसके जो आंसू आते हैं, मोरनी उसे चुगकर गर्भवती होती है। जिस पर काफी विवाद गर्मा गया था।

फोटोग्राफर भरत कंसारा
हजारों की तादाद में हैं मोर
वर्ष 2021-22 की बात करें तो बांसवाड़ा में कोरोना के बीच वाइल्ड लाइफ जीवों की गणना नहीं हुई है। लेकिन, 2019-20 के आंकड़ों पर गौर करें तो बांसवाड़ा जिले में करीब 5 हजार 590 मोर थे। इनमें 1633 नर और 3257 मादाएं एवं 7 सौ बच्चे थे। इसमें भी बांसवाड़ा रेंज (समाई माता मंदिर वाला जाेन शामिल) में 220 नर, 332 मादा एवं 123 बच्चे थे।
इसी प्रकार वर्ष 2020-21 की बात करें तो जिले में कुल 4742 मोर गणना में आए थे। इनमें 1300 नर थे, जबकि 2890 मादाएं और 552 बच्चे थे। इसमें रेंज बांसवाड़ा के 80 नर, 190 मादा एवं 129 बच्चे शामिल हैं।