रक्षा कवच का काम करती है ओजोन, क्षरण के आएंगे गंभीर परिणाम
by seemasandesh
विश्व ओजोन दिवस के मौके पर जिला स्तरीय कार्यक्रम आयोजित हनुमानगढ़ (सीमा सन्देश न्यूज)। विश्व ओजोन दिवस के मौके पर शुक्रवार को टाउन के राजकीय नेहरू मेमोरियल स्नातकोत्तर महाविद्यालय परिसर के हॉल में वन विभाग के सहयोग से जिला स्तरीय कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में बच्चों को ओजोन परत का महत्व बताते हुए ओजोन परत को बचाने के लिए जागरुक किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता रामपाल अहरोदिया ने की। मुख्य अतिथि क्षेत्रीय वन अधिकारी शंकरलाल, विशिष्ट अतिथि वन विभाग के सहायक लेखाधिकारी दिनेश कुलड़िया थे। मुख्य वक्ता सेवानिवृत्त एडीईओ व राज्यपाल-राष्टÑपति पुरस्कार प्राप्त हरिकृष्ण आर्य व रयान कॉलेज के प्राचार्य डॉ. सन्तोष राजपुरोहित थे। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि धरती पर जीवन के प्रमुख कारकों में हवा, पानी की तरह सूर्य की किरणें भी शामिल हैं। लेकिन, यह अगर उसी रूप में धरती पर आएं। जिस रूप में सूर्य से निकलती हैं, तो वरदान के बदले अभिशाप हो जाएंगी। इनमें मौजूद पराबैंगनी किरणें काफी घातक होती हैं। वायुमंडल का ओजोन परत, सभी घातक किरणों को सोख कर मानव के लिए उपयोगी किरणें धरती पर भेजता है। यह जीवन रक्षक छाते की तरह है, लेकिन बढ़ते कल-कारखाने और वाहनों से निकलने वाले धुएं ने इस परत को नुकसान पहुंचाया है। इसमें दिनों दिन छेद हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि ओजोन परत पृथ्वी और पर्यावरण के लिए एक सुरक्षा कवच का कार्य करती है व सूर्य की खतरनाक पराबैंगनी किरणों से बचाती है। आज के समय में बढ़ते औद्योगीकरण के कारण वायुमंडल में कुछ ऐसे रसायनों की मात्रा बढ़ गई है जिसके दुष्प्रभाव से ओजोन परत पर खतरा बढ़ता जा रहा है। उन्होंने कहा कि समताप मंडल में स्थित ओजोन परत पृथ्वी की रक्षा कवच का काम करती है, लेकिन ओजोन-क्षयकारी पदार्थों के बेतहाशा उत्सर्जन से न सिर्फ ओजोन निर्माण की प्राकृतिक प्रक्रिया प्रभावित हुई है, बल्कि समताप मंडल में ओजोन की मात्रा भी घटी है। ओजोन परत की सांद्रता कम होने से पराबैंगनी किरणें आसानी से धरातल पर पहुंच जाती हैं। इससे धरती पर जीवन कठिन हो जाता है। ओजोन के स्तर में गिरावट के परिणामस्वरूप ओजोन परत सूर्य की पराबैंगनी किरणों को रोकने में अक्षम हो जाती है, जिसका मानव स्वास्थ्य और पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। पौधों और फसलों की वृद्धि भी प्रभावित होती है। पैदावार में गिरावट से लेकर पोषक तत्वों में कमी आ जाती है। सामुद्रिक पारितंत्र पर भी इसका पड़ता है, जिससे समुद्री जीवों की जीवटता और प्रजनन क्षमता के साथ-साथ समुद्री खाद्य शृंखला भी प्रभावित होती है। वैज्ञानिकों का भी ऐसा मानना है कि ओजोन परत के बिना पृथ्वी पर जीवन का अस्तित्व समाप्त हो जाएगा। इसलिए ओजोन परत को बचाने के लिए हमें मिलकर आगे आना होगा, हमें स्वयं भी इसके प्रति जागरुक होना होगा और अपने आसपास के लोगों को भी इसके प्रति जागरुक करना हमारा कर्तव्य बनता है। डॉ. सुभाष सोनी ने ओजोन परत को धरती का हेलमेट बताया। इस मौके पर विनोद खुड़ीवाल, भागवन्ती, अनमोल शर्मा, डॉ. अर्चना गोदारा, भावना, सिद्धार्थ राव, शिशुपाल, छात्रसंघ उपाध्यक्ष योगिता, संयुक्त सचिव कुलदीप सहित छात्र-छात्राएं मौजूद थे। कार्यक्रम के बाद अतिथियों की ओर से कॉलेज प्रांगण में एनएसएस व एनसीसी कैडेटस के साथ पौधरोपण भी किया गया। इस दौरान कुल 100 पौधे लगाए गए। पर्यावरण संरक्षण के लिए जागरूकता का प्रचार-प्रसार करने की शपथ ग्रहण के साथ कार्यक्रम सम्पन्न हुआ।