निर्माता दिनेश विजन हिंदी सिनेमा में प्रयोगधर्मी सिनेमा के लंबे समय से अमलबरदार रहे हैं। उनकी फिल्म कंपनी मैडॉक फिल्म्स का इसीलिए नाम भी हिंदी फिल्म जगत में काफी सम्मान से लिया जाता है। नए निर्देशकों को मौका देने में वह अग्रणी रहे हैं। राजकुमार राव उनके नियमित सितारे हैं और कृति सैनन का तो बायोडाटा ही मैडॉक फिल्म्स से शुरू होता है। दोनों ‘बरेली की बर्फी’ में साथ दिख चुके हैं। लेकिन, सिनेमा सिर्फ सितारे ही नहीं चलाते। इसके लिए पहली जरूरत है एक अच्छी और मनोरंजन से भरपूर कहानी की। ऐसी अदाकारी की जो स्वाभाविक लगे। और, सबसे जरूरी बात निर्देशन ऐसा हो जो उस कहानी को दर्शकों से जोड़ सके। वर्चुअल रियलिटी (वीआर) का ऐप बनाने वाले और ब्लॉगिंग को अपना करियर बनाने की हिम्मत रखने वाली युवा पीढ़ी की नुमाइंदगी करती ये फिल्म अपनी कहानी के झोल से मार खा गई है।