जयपुर
कोरोना की तीसरी लहर भले ही पूरी तरह खत्म नहीं हुई हो, लेकिन उसके साइड इफेक्ट्स आने शुरू हो गए। पहली और दूसरी लहर की तरह तीसरी लहर में भी राजस्थान में ब्लैक फंगस (म्यूकरमाइकोसिस) के केस आने लग गए हैं। राजस्थान के सबसे बड़े हॉस्पिटल SMS हॉस्पिटल की नाक, कान, गला (ईएनटी) विंग के आंकड़े इसकी गवाही दे रहे हैं। पिछले डेढ़ महीने में ब्लैक फंगस के 20 केस मिल चुके हैं। राहत की बात ये है कि कोई केस क्रिटिकल नहीं है। वर्तमान में यहां 7 मरीज भर्ती हैं और 13 मरीजों को छुट्टी दी जा चुकी है।
SMS मेडिकल कॉलेज के सीनियर प्रोफेसर डॉ. पवन सिंघल की मानें तो इस बार जो केस आए हैं, वह ज्यादा गंभीर नहीं हैं। अभी तक एक भी ऐसा केस नहीं आया है, जिसमें फंगस दिमाग में फैल गया हो या आंख में बुरी तरह इफेक्ट किया हो। डेल्टा वैरियंट के समय सबसे ज्यादा केस आए थे। डेल्टा वैरियंट से ग्रसित जिन कोरोना मरीजों का इलाज किया था, उनको स्टेरॉयड बहुत ज्यादा मात्रा में दिया गया। स्टेरॉयड से शुगर लेवल भी बढ़ा और फंगस की बीमारी भी तेजी से फैली।