जयपुर
राजस्थान में राज्यसभा के चुनाव 10 जून को होने वाले हैं। कांग्रेस और बीजेपी ने प्रत्याशियों का ऐलान नहीं किया है।कांग्रेस को खाली हो रही राज्यसभा की 4 में से 3 सीटों पर जीत की उम्मीद है। राजस्थान और गुजरात विधानसभा चुनाव के मद्देनजर इस बार एक सीट पर किसी आदिवासी नेता को मौका देने की उठ रही मांग पर कांग्रेस में पेच फंस गया है। राजस्थान कांग्रेस के अंदर खाने आदिवासी को टिकट देने की मांग तेजी से उठ रही है। गुजरात विधानसभा चुनावों के मद्देनजर यह मांग काफी अहम मानी जा रही है। दक्षिण राजस्थान के आदिवासी नेताओं में से CWC सदस्य रघुवीर मीना और पूर्व सांसद ताराचंद भगौरा ने अपनी दावेदारी भी पेश कर दी है। लेकिन दिनेश खोड़निया की दावेदारी से पेच फंस गया है। दिनेश खोड़निया जैन समुदाय से आते हैं। बीटीपी नेताओं की शर्त है कि किसी आदिवासी को उम्मीदवार बनाने पर ही कांग्रेस को समर्थन दिया जा सकता है।
आदिवासी नेता कर रहे हैं खोड़निया की दावेदारी का विरोध
गहलोत के करीबी होने की वजह से दिनेश खोड़निया की दावेदारी मजबूत मानी जा रही है। यूथ कांग्रेस के जिला अध्यक्ष एवं डूंगरपुर विधायक गणेश घोघरा ने दिनेश खोड़निया पर आदिवासी नेताओं में फूट डालने का आरोप लगाते हुए विधानसभा की सदस्यता से अपना इस्तीफा सीएम गहलोत को भेज दिया था। गणेश घोघरा दिनेश खोड़निया की दावेदारी का विरोध कर रहे हैं। प्रतापगढ़ विधायक रामलाल मीना भी खोड़निया की दावेदारी का विरोध कर रहे हैं।
बीटीपी ने कांग्रेस के सामने रखी शर्त
राजस्थान राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस की 2 सीटों पर और बीजेपी की एक सीट पर जीत पक्की है। कांग्रेस को तीसरी सीट जीतने के लिए निर्दलीय विधायक, बीटीपी, माकपा और आरएलडी के समर्थन की आवश्यकता है। सभी 13 निर्दलीय विधायकों ने कांग्रेस को समर्थन देने का भरोसा दिया है। माकपा के दोनों विधायकों और आरएलडी के एक विधायक का भी कांग्रेस को समर्थन मिलने के पूरे आसार बन रहे है। लेकिन भारतीय ट्राइबल पार्टी यानी बीटीपी ने पेच फंसा दिया है। बताया जाता है कि बीटीपी ने समर्थन देने के लिए शर्त रखी है। हालांकि, आधिकारिक तौर पर बीटीपी के नेता बयान देने से बच रहे हैं। बीटीपी किसी आदिवासी को टिकट मिलने पर ही समर्थन देगी। पार्टी का आरोप है कि कांग्रेस के राज में महेशा आदिवासियों की कमान गैर आदिवासियों के हाथ में रही है। 40 सालों में किसी आदिवासी को राज्यसभा का सदस्य नहीं बनाया है। आदिवासियों की उपेक्षा सहन नहीं करेंगे। हालांकि, कांग्रेस पार्टी ने 2006 में पूर्वी राजस्थान से आदिवासी नेता मूलचंद मीना को राज्यसभा से संसद भेजा था।