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लंपी से 14 हजार मौत, सरकार ने इंश्योरेंस नहीं कराया

पशुपालकों को 70 करोड़ नुकसान, 4 साल से ठप पड़ी स्कीम
जयपुर
. पिछले 4 साल से प्रदेश में पशुपालकों के पशुओं की इंश्योरेंस स्कीम ही ठप पड़ी है। पशुपालकों और किसानों की सरकारों को कितनी चिन्ता है,इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि राजस्थान का पशुपालन विभाग 1 अक्टूबर 2018 से पशुधन बीमा योजना नहीं चला रहा है। जिसका खामियाजा अब लंपी वायरल डिजीज के मुश्किल वक्त में पशुपालकों को उठाना पड़ रहा है। राजस्थान में सरकारी रिकॉर्ड के मुताबिक लंपी से अब तक 14 हजार 45 की मौत हो चुकी है। पिछले 9 दिन में ही सवा 2 लाख पशु लंपी से संक्रमित हुए हैं, 10 हजार की मौत हो गई है। इससे पहले कुल 4 हजार की मौत हुई थी। केवल लंपी डिजीज में मरे पशुओं को इंश्योरेंस हुआ होता, तो 50 हजार के हिसाब से राजस्थान के पशुपालकों को 70 करोड़ 22 लाख 50 हजार रुपए मिलते। बाकी दुर्घटनाओं में मौतों का आकलन अलग से करें, तो यह इंश्योरेंस अमाउंट का आंकड़ा 100 करोड़ पार कर जाता। लेकिन अफसोस इन पशुपालकों और किसानों को मुआवजा नहीं मिल सकेगा। क्योंकि उनके पशुओं का इंश्योरेंस ही नहीं हुआ।
लंपी के कहर से राजस्थान में पशुओं की बड़े स्तर पर रोजाना मौतें हो रही हैं। बीते 24 घंटों में प्रदेश में लंपी से 1236 पशुओं ने दम तोड़ दिया है। बीते एक दिन में 28 हजार 979 पशु संक्रमित हुए हैं। प्रदेशभर में संक्रमित पशुओं का कुल आंकड़ा 3 लाख 10 हजार 460 हो गया है। राज्य के 24 पशु जिले लंपी संक्रमण की चपेट में आ चुके हैं। इनमें जोधपुर, बाड़मेर, जैसलमेर, जालोर, पाली, सिरोही, बीकानेर, चूरू, हनुमानगढ़, गंगानगर, अजमेर, नागौर, भीलवाड़ा, कुचामन सिटी, टोंक, जयपुर, सीकर, झुंझुनूं, अलवर, उदयपुर, बांसवाड़ा, राजसमंद, डूंगरपुर और प्रतापगढ़ शामिल हैं।
सूत्रों के अनुसार 2018-19 में पशु बीमा के लिए बीमा कंपनियों ने भारत सरकार के लेवल पर तय प्रीमियम रेट से ज्यादा इंश्योरेंस प्रीमियम रेट दीं। राजस्थान सरकार ने पशुओं का इंश्योरेंस ही नहीं करवाया। साल 2019-20 में भारत सरकार से तय समय पर पैसा मिलने मिलने का हवाला देते हुए टेंडर जारी नहीं किया गया। इसके बाद 2020-21 में किसी भी इंश्योरेंस कंपनी ने टेंडर प्रोसेस में ही हिस्सा नहीं लिया। साल 2021-22 में भारत सरकार से मिली संशोधित प्रीमियम रेट के अनुसार 28 अक्टूबर 2021 को जब टेंडर निकाला गया। तो सिर्फ एक इंश्योरेंस कंपनी से हिस्सा लिया। जिसने प्रदेश के 7 में से केवल दो सम्भाग- जयपुर और अजमेर के लिए टेंडर भरे। इस कारण पशु इंश्योरेंस स्कीम लागू नहीं हो सकी।