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लवलिना बोरगोहेन का इंटरव्यू:टोक्यो हुआ अतीत, अब पेरिस ओलिंपिक के लिए खुद को एक नए सिरे से तैयार करेंगी लवलिना

टोक्यो ओलिंपिक में भारत की झोली में कुल 7 पदक आए। इन सात पदकों में से एक पदक बॉक्सर लवलिना बोरगोहेन के खाते में आया। लवलिना ने ब्रॉन्ज मेडल पर अपना कब्जा जमाया। गोल्ड जीतने का सपना देख रही 24 वर्षीय मुक्केबाज को ब्रॉन्ज से संतुष्ट रहना पड़ा। सेमीफाइनल में लवलिना का सामना 69 KG वेट कैटेगरी में तुर्की की बुसेनाज सुरमेली से हुआ।

सेमीफाइनल में लवलिना को हार का सामना करना पड़ा, लेकिन मुकाबला हारकर भी लवलिना सभी का दिल जीतने में सफल रही। टोक्यो में भले ही लवलिना गोल्ड जीतने से चूक गई हो, लेकिन देश के लिए गोल्ड जीतने का उनका लक्ष्य अभी भी बरकरार है। लवलिना की निगाहें अब 2024 में होने वाले पेरिस ओलिंपिक पर लगी हुई है।

हाल ही में लवलिना ने पीटीआई से साथ खास बातचीत के दौरान टोक्यो ओलिंपिक की जर्नी और आगामी पेरिस ओलिंपिक को लेकर अपनी तैयारियों के बारे में बातचीत की।

8 सालों तक परिवार से बनाकर रखी दूर

लवलिना बोरगोहेन ने इस मुकाम तक पहुंचने के लिए 8 सालों तक अपने परिवार से दूरी बनाकर रखी। लवलिना के मुताबिक, ‘‘मेरा पहला बलिदान पिछले आठ वर्षों से घर से दूर रहना और मुश्किल परिस्थितियों में परिवार वालों का साथ नहीं दे पाना था। यह सबसे बड़ा बलिदान था। मैंने व्यक्तिगत तौर पर अपनी कुछ इच्छाओं को मारा जैसे वह भोजन नहीं कर पाना जैसा कि मेरी उम्र के लोग पसंद करते हैं। मैंने खेल पर ध्यान देने के लिए अवकाश नहीं लिया और ऐसा लगातार आठ साल तक चला।’’

लवलिना ने आगे कहा, ‘‘मैंने व्यक्तिगत तौर पर अपनी कुछ इच्छाओं को मारा जैसे वह भोजन नहीं कर पाना जैसा कि मेरी उम्र के लोग पसंद करते हैं। मैंने खेल पर ध्यान देने के लिये अवकाश नहीं लिया और ऐसा लगातार आठ साल तक चला।’’

बता दें कि, लवलिना एमसी मेरीकॉम और विजेंद्र सिंह के बाद ओलिंपिक में पदक जीतने वाली सिर्फ तीसरी भारतीय मुक्केबाज है।

छोटा सा ब्रेक फिर पेरिस की तैयारी

ब्रॉन्ज मेडलिस्ट लवलिना बोरगोहेन फिलहाल एक छोटे से ब्रेक के बाद पेरिस ओलिंपिक की तैयारियों में जुट जाएंगी। उनके अनुसार, ‘‘टोक्यो ओलिंपिक अब अतीत की बात है. मुझे केवल एक नहीं अपने खेल के हर पहलू पर नए सिरे से शुरुआत करनी होगी।’’

क्वार्टर फाइनल की जीत रही सबसे खास पल

टोक्यो 2020 के क्वार्टर फाइनल में लवलिना का सामना चीनी ताइपे से हुआ था और उमसें उन्होंने निएन चेन को 4-1 से हराया था। इस जीत को लवलिना ने टोक्यो ओलिंपिक का सबसे खास पल बताया। उऩ्होंने कहा, ‘’मेरे लिए टोक्यो 2020 को सबसे खास पल क्वार्टर फाइनल में मिली जीत रही। मैंने उस बॉक्सर को हराया, जिसने मुझे इससे पहले चार बार धूल चटाई थी। ओलिंपिक में उनको हराना मेरे लिए कभी न बुलाने वाला लम्हा रहा। दूसरा यादगार पल कतर और इटली के बीच ऊंची कूद का स्वर्ण पदक साझा किया जाना रहा। इससे पता चलता है कि मानवता जिंदा है और खेल एकमात्र जरिया है जो दो देशों, दो इंसानों को इस तरह से जोड़ सकता है।‘’

करना चाहती है ये बदलाव

उनके बदलावों में अपने मुक्कों को अतिरिक्त मजबूती प्रदान करना भी शामिल होगा, क्योंकि तुर्की की ओलिंपिक चैंपियन बुसेनाज सुरमेली के खिलाफ सेमीफाइनल में हार के दौरान लवलिना का यह कमजोर पक्ष नजर आया था। लवलिना के अनुसार, ‘’ऐसा नहीं है कि ताकत पर काम नहीं किया गया। इस पर काम हो रहा था। आप यह कह सकते हैं कि वह उस स्तर पर नहीं था, जिस पर आदर्श तौर पर इसे होना चाहिए था। मैंने अपनी ताकत पर केवल पिछले चार महीनों में ही काम किया।‘’

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