दुनियाभर में पढ़ाई के लिए कम्प्यूटर, लैपटॉप और स्मार्टफोन का इस्तेमाल बढ़ रहा है। नतीजा, लिखने के लिए पेन या पेन्सिल का इस्तेमाल कम हो रहा है और टाइपिंग का क्रेज बढ़ रहा है। इसका सीधा असर लिखावट पर पड़ रहा है। हाल में हुई रिसर्च में नई बात सामने आई है। रिसर्च कहती है, कुछ नया सीखना चाहते हैं तो टाइपिंग से बेहतर है चीजों को लिखकर सीखना।
ई-लर्निंग के दौर में बच्चों और बड़ों दोनों को हाथों की लिखावट से दूरी नहीं बनानी चाहिए। जॉन हॉप्किन्स यूनिवर्सिटी की रिसर्च कहती है, वीडियो देखकर या टाइपिंग करके कुछ सीखने के मुकाबले हाथों से लिखकर सीखना बेहतर विकल्प है।
42 लोगों पर हुई रिसर्च
शोधकर्ता ब्रेंडा रैप के मुताबिक, ज्यादातर पेरेंट्स और एजुकेटर कहते हैं, हमारे बच्चे को हैंड राइटिंग में क्यों समय बिताना चाहिए। लेकिन समझने वाली बात है कि हाथों से लिखते हैं तो लिखावट भी बेहतर होती है।
साइकोलॉजिकल साइंस जर्नल में पब्लिश रिसर्च कहती है, हाथों की लिखावट कितनी असरदार है, इसे समझने के लिए एक प्रयोग किया गया है। इस प्रयोग में 42 लोग शामिल किए गए। इन्हें 3 ग्रुप में बांटकर अरेबिक अल्फाबेट पढ़ाए गए। इसमें अल्टाबेट को लिखने वाले, टाइप करने वाले और वीडियो देखकर से समझने वाले रहे।
सभी 42 लोगों ने वीडियो देखकर, लिखकर और सुनकर अल्फाबेट्स सीखे। इसके बाद वीडियो देखने वालों को अल्फाबेट से जुड़ा कार्ड स्क्रीन पर दिखाया गया और पूछा गया क्या यह वही लेटर है जिसे देखा था। अक्षरों को लिखकर समझने वालों को पेन से पेपर पर अल्फाबेट कॉपी करने को कहा गया। वहीं, टाइप करने वालों से अक्षर की-बोर्ड पर ढूंढने को कहा गया।
6 बार ऐसे सेशन करने के बाद सामने आया कि तीनों ग्रुप के लोगों ने गलतियां कीं। खास बात रही कि हाथ से लिखने वाले लोगों ने दूसरे ग्रुप के मुकाबले ज्यादा तेजी से सीखा। इनमें से कुछ ऐसे भी थे जिन्होंने मात्र 2 सेशन में अल्फाबेट सीख लिए।