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श्रीगंगानगर में साढ़े नौ सौ हैक्टेयर में हो रहा उत्पादन, हर दिन हजारों टन गाजर मंडी में ला रहे किसान

श्रीगंगानगर

जिले में इन दिनों उत्पादन हो रही गाजर रंग और मिठास के लिहाज से अलग ही पहचान रखती है। यहां की गाजर में खासयित देख किसानों ने शहर से सटे गांव साधुवाली में इसके लिए अपने स्तर पर ही मंडी विकसित कर ली है। हालांकि सरकार की ओर से पूरा सपोर्ट नहीं मिल पाने से गाजर के इस बिजनेस का पूरा डवलपमेंट तो नहीं हो पाया है लेकिन किसानों का कहना है कि सरकार पूरा सहयोग करें और गाजर मंडी विकसित करवाए तो यह गाजर श्रीगंगानगर के अलावा अन्य जगह भी अच्छी पहचान बना सकती है।

यूपी, बिहार, महाराष्ट्र में मांग
सब्जी के उत्पादक बताते हैं कि श्रीगंगानगर की इस गाजर की मांग उत्तरप्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र सहित देश के कई राज्यों में है। कुछ लोग उसे वहां भिजवाते भी हैं लेकिन खर्च करीब पांच रुपए प्रति किलो तक पड़ता है। ऐसे में बड़े खर्च के चलते अधिकांश लोग राजस्थान और पंजाब के जिले से सटे इलाके में ही इसे बेच लेते हैं।

जिले में साढ़े नौ सौ हैक्टेयर में उत्पादन
गाजर का यह उत्पादन जिले में साढ़े नौ सौ हैक्टेयर में है। हर दिन बड़ी संख्या में किसान शहर के निकट गांव साधुवाली में अस्थाई गाजर मंडी में गाजर लेकर आते हैं। यह गाजर यहां ट्रॉलियों में लाया जाता है। किसानों ने अपने स्तर पर यहां गाजर साफ करने की मशीनें लगाई हैं। यहां से इस गाजर को साफ करके बिक्री के लिए भेजा जाता है।

इसलिए है श्रीगंगानगर की गाजर में ज्यादा मिठास
श्रीगंगानगर की गाजर में ज्यादा मिठास और रंग गहरा लाल होने का बड़ा कारण यहां की क्लाइमेटिक कंडीशन हैं। यहां गाजर की बुवाई गर्मी के सीजन के अंत में होती है। इस दौरान उसे कुछ बरसात भी मिलती है और सर्दी में जब तापमान दस डिग्री से नीचे चला जाता है तब इसे निकाला जाता है। ऐसे में इसका रंग और मिठास एक अलग पहचान रखता है।

घोषणा हुई लेकिन नहीं हुआ काम
श्रीगंगानगर सब्जी उत्पादक संघ के अध्यक्ष अमरसिंह बताते हैं कि इलाके में विशिष्ट गाजर मंडी स्थापित करने को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने घोषणा की थी। सरकार बदली और वर्तमान मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से भी आग्रह किया गया लेकिन इस पर काम अब तक नहीं हो पाया। उनका कहना है कि अगर गाजर को लेकर सरकार सुविधाएं दें किन्नू की तरह विशेष ट्रेन चले तो श्रीगंगानगर की गाजर भी देश के अलग-अलग हिस्सो और विदेश में पहचान बना सकती है।

श्रीगंगानगर के गाजर की है मांग
एसिस्टेंट डायरेक्टर हॉर्टिकल्चर प्रीति गर्ग बताती हैं कि श्रीगंगानगर की गाजर अभी पश्चिम बंगाल, बिहार ओर कुछ राज्यों में जा रही है। इस तरफ ध्यान दिया जाए तो प्रोडक्शन की खपत बाहर के राज्यों में बढ़ सकती है। किन्नू की तर्ज पर विशेष ट्रेन चलाई जा सकती है। जिले में 950 हैक्टैयर में अभी गाजर उत्पादन हो रहा है।

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