जयपुर. जयपुर घराने की पूर्व राजमाता गायत्री देवी की वसीयत से जुड़े मामले पर पिछले दिनों जयपुर की कोर्ट ने एक फैसला देकर उनके पोते-पोती को बड़ी राहत दी है। इससे गायत्री देवी की वसीयत से जुड़ा विवाद फिर सुर्खियों में आ गया है। पूरा मामला जानने से पहले पढ़िए, क्या है गायत्री देवी की वसीयत…
‘मैं जयपुर की राजमाता गायत्री देवी। यह पुष्टि करती हूं कि मेरे पोते-पोती महाराज देवराज और लालित्या से मेरे प्रेम और स्नेह के चलते मैं रामबाग पैलेस होटल प्राइवेट लिमिटेड, जय महल होटल्स प्राइवेट लिमिटेड, SMS इन्वेस्टमेंट कॉर्पोरेशन प्राइवेट लिमिटेड, सवाई माधोपुर लॉज प्राइवेट लिमिटेड और जयपुर ताज एंटरप्राइजेस को संयुक्त रूप से महाराज देवराज और राजकुमारी लालित्या को ट्रांसफर करने के लिए पहले ही जरूरी ट्रांसफर डीड पर हस्ताक्षर कर चुकी हूं। यह शेयर होल्डिंग मेरे बेटे महाराज जगत सिंह के निधन पर जयपुर के डिस्ट्रिक्ट जज के ऑर्डर से मुझे प्राप्त हुई हैं।
जीवन अनिश्चित है, इसलिए मैं अपने परिवार में किसी तरह के विवाद से बचने के लिए अपनी संपत्तियों का प्रावधान करना चाहती हूं। पूर्व की सभी वसीयतों को पलटते हुए अब मैं घोषणा करती हूं कि इस आखिरी इच्छा के अनुसार मेरे निधन पर मेरी सभी सम्पत्तियां, ज्वेलरी, कैश, स्कूलों की कंट्रोलिंग देवराज और लालित्या को हमेशा के लिए मिल जाए। मुझे विश्वास है कि मेरी इन इच्छाओं को सभी तरह से पूरा करते हुए महाराजा भवानी सिंह, महाराज पृथ्वी सिंह और महाराज जय सिंह मेरे पोते-पोतियों को पूरा सपोर्ट करेंगे।’