नई दिल्ली
जाने वाला हर साल इंसान को कुछ सिखाकर, कोई पाठ पढ़ाकर ही विदा लेता है। पिछले दो साल में कोरोनाकाल के दौरान लोगों ने डिजिटली काफी कुछ सीखा हैं। फिर चाहे वो ऑनलाइन पेमेंट करने की बात हो। या फिर ऑनलाइन स्टडी और वर्क फ्रॉम होम की। बच्चे इस दौरान ऑनलाइन गेमिंग के करीब पहुंच गए। भारत अब गेमिंग ऐप के लिहाज से गूगल प्ले स्टोर और एपल प्ले स्टोर के लिए सबसे बड़े बाजारों में से एक है। देश के लोगों ने मोबाइल गेम्स पर जमकर पैसे खर्च भी किए हैं।
क्राफ्टन इंक कंपनी में इंडिया और मिडिल ईस्ट एंड नॉर्थ अफ्रीका के हेड, अनुज टंडन ने बताया कि 2020 से 2021 तक एक बड़ा बदलाव यह था कि लोगों ने मोबाइल गेम्स पर ज्यादा पैसे खर्च करना शुरू कर दिए हैं। 2020 में लोगों का गेम्स को लेकर इंगेजमेंट भी ज्यादा रहा है। 2022 में भी ये सिलसिला जारी रहेगा। ऐप की खरीदारी में इस साल ज्यादा तेजी आएगी।
रियल मनी गेम्स का रेवेन्यू 13 हजार करोड़ से ज्यादा टंडन के अनुसार, बैटल रॉयल बेस्ड चार से पांच मोबाइल गेम भारत में इन-ऐप खरीदारी से 100 मिलियन डॉलर (करीब 754 करोड़ रुपए) से ज्यादा कमा रहे हैं। इन गेम्स का रेवेन्यू लगातार बढ़ रहा है। 2022 में इन-ऐप खरीदारी से देश की इकोनॉमी भी बूस्ट होगी। अभी इनमें रियल मनी गेम्स शामिल नहीं हैं। गेमिंग और इंटरेक्टिव मीडिया वेंचर फंड लुमिकाई और कंसल्टिंग फर्म रेडसीर की रिपोर्ट के मुताबिक, फाइनेंशियल ईयर 2020 में रियल मनी गेम्स का रेवेन्यू 1.8 बिलियन डॉलर (करीब 13.58 हजार करोड़ रुपए) तक पहुंच गया। उसका ओवरऑल इंडस्ट्री में 51% योगदान रहा।