Friday, May 1निर्मीक - निष्पक्ष - विश्वसनीय
Shadow

सरकारी बीमा कंपनियों के निजीकरण के लिए कानून में हो रहा बदलाव, मानसून सत्र में आ सकता है बिल

नई दिल्ली

केंद्र सरकार ने सार्वजनिक क्षेत्र की बीमा कंपनियों के निजीकरण की तैयारी शुरू कर दी है। इसको लेकर जनरल इंश्योरेंस बिजनेस (नेशनलाइजेशन) एक्ट (GIBNA) में बदलाव पर काम चल रहा है। कानून में बदलाव वाला यह बिल मानसून सत्र के दौरान संसद में पेश किया जा सकता है। संसद का मानसून सत्र 19 जुलाई से शुरू होने की उम्मीद है।

1972 में लागू हुआ था GIBNA

जनरल इंश्योरेंस बिजनेस (नेशनलाइजेशन) एक्ट (GIBNA) 1972 में लागू हुआ था। इस एक्ट में इंडियन इंश्योरेंस कंपनीज के अधिग्रहण और शेयर ट्रांसफर से जुड़े कानून हैं। सूत्रों के मुताबिक, GIBNA में बदलाव से जुड़ा कार्य पूरा हो चुका है और यह आने वाले सत्र में संसद में पेश किया जा सकता है। इन बदलावों से जनरल इंश्योरेंस कंपनियों के निजीकरण में मदद मिलेगी। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने वित्त वर्ष 2021-22 के बजट में बड़े स्तर पर निजीकरण की घोषणा की थी। इसमें सार्वजनिक क्षेत्र के दो बैंकों और एक जनरल इंश्योरेंस कंपनी का निजीकरण शामिल था।

वित्तीय सेक्टर में विनिवेश को बढ़ाना चाहती है सरकार

वित्तीय सेक्टर में विनिवेश बढ़ाने की रणनीति के तहत सरकार ने लाइफ इंश्योरेंस कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (LIC) का मेगा इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (IPO) लाने का फैसला किया है। इसके अलावा सरकार चालू वित्त वर्ष में IDBI बैंक में से अपनी हिस्सेदारी को घटाना चाहती है। वित्त मंत्री ने बजट में 2021-22 के दौरान विनिवेश के जरिए 1.75 लाख करोड़ रुपए जुटाने का लक्ष्य तय किया था। यह राशि पब्लिक सेक्टर की कंपनियों और वित्तीय संस्थानों की हिस्सेदारी बेचकर जुटाई जाएगी।

यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी का हो सकता है निजीकरण

विनिवेश के लक्ष्य को पूरा करने के लिए निजीकरण किए जाने वाले दो बैंकों और एक जनरल इंश्योरेंस कंपनी की पहचान करने की जिम्मेदारी नीति आयोग को दी गई थी। माना जा रहा है कि नीति आयोग ने विनिवेश पर बने सचिवों के कोर ग्रुप को यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस के निजीकरण का सुझाव दिया है। इसके अलावा दो बैंकों के निजीकरण योग्य बनाने के लिए बैंकिंग रेगुलेशन एक्ट 1949 में भी बदलाव की तैयारी कर रही है।

इंश्योरेंस कंपनियों को पिछले साल मिला था कैपिटल सपोर्ट

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय कैबिनेट ने पिछले साल नेशनल इंश्योरेंस, ओरियंटल इंश्योरेंस और यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस को कैपिटल सपोर्ट देने वाले प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। इसके अलावा कैबिनेट ने नेशनल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड में ऑथराइज्ड कैपिटल को 7500 करोड़ रुपए बढ़ाने का फैसला किया था। साथ ही यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड और ओरियंटल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड में 5000-5000 करोड़ रुपए के कैपिटल इंफ्यूजन का फैसला किया था। इसी बैठक में केंद्रीय कैबिनेट ने नेशनल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड, ओरियंटल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड और यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड के विलय के प्रस्ताव को रद्द कर दिया था।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *