कोरोना से हुई मौत के बाद पीड़ित के पसीने छुड़ा रहा सिस्टम पक्काभादवां (सीमा सन्देश न्यूज)। महामारी के इस दौर में कोरोना के कारण अपने परिवार जन की मौत के बाद जो दर्द बीमारी ने दिया उससे ज्यादा भयंकर दर्द अब सरकारी सिस्टम पीड़ित को देने में गुरेज नहीं कर रहा। कोरोना के कारण जान गंवाने वालों को चार लाख की आर्थिक सहायता सरकार द्वारा दिए जाने के झमेले में कई तरह के पेच उभर कर सामने आ रहे हैं। पहला पेच तो यही है कि अस्पताल यह लिख कर देने में ही गुरेज कर रहा है कि मौत कोरोना से हुई। अगर किसी जागरूक ने मौत का वास्तविक कारण लिखित में ले लिया तो अस्पताल के डॉक्टरों के लापरवाही देखिए एक ही मृत्यु रिपोर्ट में ऊपर दिवंगत की मौत कोरोना से होना बताई जाती है लेकिन उसी पेज में नीचे मृत्यु का वास्तविक कारण निमोनिया बता दिया जाता है और यहीं से सारा झमेला शुरू होता है। जानकारी के अनुसार गांव पक्काभादवां की वार्ड 2 निवासी 75 वर्षीय महिला कमलादेवी पत्नी अमरसिंह सोनी को स्वास्थ्य संबंधी तकलीफ होने पर 6 मई 2021 को जिला अस्पताल में जांच हेतु ले जाया गया। जहां डॉक्टरों ने महिला को कोरोना वार्ड में भर्ती कर उपचार शुरू कर दिया। लगातार कई दिन तक उपचाराधीन रही कमलादेवी की मौत 27 मई को जिला अस्पताल के कोरोना वार्ड में हो गई। परिजनों को डेडबॉडी कोरोना किट में डाल कर दी गई। चिकित्सकों के कहे अनुसार परिजनों ने मृत्यु के बाद हिंदू धर्म के होने वाले तमाम रीति रिवाजों को भूलकर कोरोना गाइडलाइन का पालन करते हुए मृतका का दाह संस्कार कर दिया। शव देते समय लिखित में दी गई मृत्यु रिपोर्ट में जिला अस्पताल के उप नियंत्रक डॉक्टर गौरीशंकर ने जहां एक तरफ महिला की मौत कोरोना से होने की तस्दीक लिखित में की वहीं इसी रिपोर्ट में नीचे मौत का वास्तविक कारण निमोनिया लिख दिया। यही नहीं अस्पताल की तरफ से मृत्यु प्रमाण पत्र देते समय भी महिला की मृत्यु का कारण कोरोना बताया गया। मृत महिला के पति अमरसिंह सोनी ने 23 जून 2021 को स्थानीय जिला कलक्टर कार्यालय में अपनी पत्नी की कोविड-19 से मृत्यु होने पर आर्थिक सहायता दिलवाने के लिए आवेदन दिया। जिला कलक्टर कार्यालय से संयुक्त शासन सचिव आपदा प्रबंधन सहायता एवं नागरिक सुरक्षा विभाग जयपुर के पत्रांक 1188 का हवाला देते हुए पीड़ित को कोविड-19 मृतक को एसडीआरएफ नॉर्म्स के अनुसार सहायता देय नहीं होने की जानकारी लिखित में देते हुए किसी तरह की मदद से इनकार कर दिया। अब पीड़ित ने जिला अस्पताल के उप नियंत्रक डॉक्टर गौरी शंकर के खिलाफ न्यायालय में जाने का फैसला लिया है । पीड़ित का कहना है कि एक तो उनके परिवार का सदस्य चला गया ऊपर से सरकारी सिस्टम उन्हें दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर कर रहा है। अगर नियमों के पेच में फंसा कर सरकार सहायता देने की मंशा ही नहीं रखती है तो वह तो झूठी घोषणा ही क्यों कर रही है। वहीं पीड़ित के अनुसार जिला अस्पताल के उप नियंत्रक ने एक ही रिपोर्ट पर मौत के दो कारण लिखते हुए उनसे घिनौना मजाक किया जो किसी भी सूरत में माफ करने लायक नहीं है। इसलिए अब वे न्यायालय का दरवाजा खटखटाएंगे। 2 दिन पहले ही सुप्रीम कोर्ट ने केन्द्र सरकार को दिए हैं सहायता उपलब्ध करवाने के निर्देश सुप्रीम कोर्ट ने अभी बुधवार को अपने एक अहम फैसले में कोरोना के कारण जान गंवाने वालों के परिजनों को अनुग्रह राशि केन्द्र सरकार की ओर से शीघ्र दिए जाने के निर्देश जारी किए हैं। हालांकि अनुग्रह राशि कितनी दी जाएगी यह फैसला सरकार पर छोड़ दिया है। सुप्रीम कोर्ट के जज अशोक भूषण और एमआर शाह की खंडपीठ ने फैसले में कहा कि राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन अधिनियम की धारा 12 के प्रावधानों के तहत प्राधिकरण राष्ट्रीय आपदा के पीड़ितों को न्यूनतम राहत प्रदान करने के लिए संवैधानिक तौर पर बाध्य है। कोर्ट ने गौरव बंसल और दीपक बंसल की याचिकाओं पर उक्त फैसला देते हुए केन्द्र सरकार की उस दलील को खारिज कर दिया कि धारा 12 अनिवार्य प्रावधान नहीं है। याचिकाकतार्ओं ने कोरोना के शिकार लोगों के परिजनों को 400000 का मुआवजा देने को लेकर सरकार को निर्देश देने की मांग की थी। क्या बोले जिला कलक्टर एक तरफ बुधवार को सुप्रीम कोर्ट की ओर से केन्द्र सरकार को निर्देश देकर राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन अधिनियम के तहत कोरोना के कारण हुई मौत के मामले में परिजनों को सहायता राशि देने की बात कही गई है तो वहीं जिला कलक्टर नथमल डिडेल की ओर से आवेदनकर्ता को एसडीआरएफ नॉर्म्स के तहत सहायता राशि नहीं दिए जाने के संबंध में लिखित जवाब दिया गया और यह दोनों ही बातें एक-दूसरे के विपरीत हैं। ऐसा लगता है कि जिला कलक्टर ने सुप्रीम कोर्ट के इस निर्णय का अध्ययन नहीं किया। जब इस बारे में जिला कलक्टर नथमल डिडेल से जानकारी चाही तो उन्होंने कहा कि एसडीआरएफ के तहत तो इस तरह की सहायता नहीं दी जा सकती किंतु अगर मृतका के परिजन सहायता लेना चाहते हैं तो वे उप निदेशक सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के यहां आवेदन करें। राज्य सरकार की तरफ से कोरोना फंड के तहत उन्हें सहायता उपलब्ध करवाने का प्रावधान है।