गांव में सार्वजनिक जगहों पर लिखवाए राजस्थानी भाषा में दोहे, श्लोक, पेंटिंग हनुमानगढ़ (सीमा सन्देश न्यूज)। 16 करोड़ राजस्थानियों की मायड़ भाषा राजस्थानी को सरकार 75 वर्षों से मान्यता नहीं दे रही है परंतु अब जनप्रतिनिधियों ने इस भाषा को व्यवहार की भाषा बनाकर मान्यता देने का बीड़ा उठा लिया है। आपणो राजस्थान आपणी राजस्थानी अभियान के तहत रामसरा नारायण की सरपंच रमनदीप कौर ने बस अड्डे, श्मशान घाट और गांव की अन्य सार्वजनिक जगहों पर राजस्थानी भाषा में दोहे, श्लोक, पेंटिंग लिखाकर राजस्थानी भाषा को मान्यता प्रदान की है। गांव के बस अड्डे पर ग्राम पंचायत रामसरा नारायण आप रो काळजै री कोर सूं मोकळो सुआगत करै सा लिखा हुआ देखकर लोग हैरान होते हैं। सरपंच रमनदीप कौर ने बताया कि हर भाषा का सम्मान करते हुए व्यक्ति को अपनी मातृभाषा से प्रेम करना चाहिए। क्योंकि इसी से ही संस्कार मिलते हैं। समाजसेवी हरदीप सिंह रोड़ीकपूरा ने बताया कि सरपंच की मातृभाषा पंजाबी है परंतु राजस्थान में जन्म लेने के कारण उन्हें भी राजस्थानी भाषा से लगाव है। गांव की जनता ने सरपंच प्रत्याशी चुना है इसलिए उन्होंने जन भावना को समझते हुए राजस्थानी में लिखवाया है। उन्होंने ग्रामीणों से अपील की कि वे पंचायत का बढ़-चढ़कर सहयोग करें ताकि गांव गांव तक यह अभियान पहुंच सके। राजस्थानी भाषा को मान्यता मिलने से बेरोजगारों को बहुत बड़ा फायदा होगा। पंचायत युवाओं के कंधे से कंधा मिलाकर काम करेगी।