अलवर
सरिस्का के जंगलों में शिकारी जहर देकर तेंदुओं को तड़पा तड़पा कर मार रहे हैं। इंटरनेशनल मार्केट में महंगे दामों में खाल, दांत और नाखून की तस्करी के लिए शिकारी सरिस्का में मौत का कारोबार चला रहे हैं। दो दिन पहले ही एक लेपर्ड और दो शावकों के शव मिले तो इसका खुलासा हुआ।
दैनिक भास्कर की टीम इंवेस्टिगेशन के लिए अलवर से 22 किमी दूर देहरा शाहपुरा से अमृतवास के आगे सरिस्का से सटे झिर के जंगलों में पहुंची। इन घने जंगलों में 400 से ज्यादा लेपर्ड और उनकी फैमिली है। इसके अलावा 25 बाघ भी हैं। अमृतवास से यह जगह करीब 5 किलोमीटर दूर है। यह वही जगह है, जहां 3 तेंदुओं के शव मिले।
यहां भास्कर टीम कमल नाम के युवक से मिली। कमल ने तेंदुओं के शव देखे थे। वह हमें एक पहाड़ पर ले गया। इसी पहाड़ पर एक नाले के नीचे डेढ़ फीट गहरे गड्ढे में तेंदुए को दबाया गया था। तेंदुए के बाल और खाल के हिस्से काफी दूर तक बिखरे हुए थे। पड़ताल में हमारे सामने कई सच सामने आए जो हैरान करने वाले थे। पढ़िए पूरी रिपोर्ट…
खाल पर कोई निशान नहीं होना चाहिए
इसलिए गोली मारने के बजाय जहर दे रहे
जानकारों का कहना है कि इंटरनेशनल मार्केट में सबसे महंगी तेंदुए की खाल ही बिकती है। डिमांड की जाती है कि तेंदुए की खाल बिल्कुल क्लीन होनी चाहिए। किसी तरह की चोट या गोली का निशान नहीं होना चाहिए, इसीलिए शिकारी न फंदा डालते हैं और न ही बंदूक या अन्य किसी हथियार से शिकार करते हैं। मारने के लिए जहर का इस्तेमाल किया जाता है।