बीकानेर. कोरोना महामारी के चलते विदेशों में रहने वाले लोग इस साल भी अपने घर नहीं आ सके। इसका मुख्य वजह है कि कई जगह आने की छूट नहीं, तो कहीं पर फ्लाइट की सुविधा नहीं मिल पा रही है। ऐसे में विदेशों में रहने वाले लोगों को अपनों की याद सता रही है। एेसे लोगों का कहना है कि अपनों से दूरी तो खल रही है, लेकिन घर आना अभी संभव नहीं। ऐसे में परिवार के लोगों की एक झलक पाने के लिए अभी सोशल मीडिया से घंटों बाते कर रहे हैं। वीडियो कॉल के माध्यम से लोग मोबाइल और लैपटॉप पर अपनों को देखकर ही बातें कर पा रहे हैं। शहर में कई परिवार तो ऐसे भी हैं, जो अपने बच्चों से दूर हैं। कुछ लोगों ने बताया कि बच्चे बाहर रहते हैं, ऐसे में अब मोबाइल ही सहारा है। इसके अलावा समय की समानता नहीं होने से भी कुछ लोग ज्यादा समय बात भी नहीं कर पाते हैं।
रात 9 बजे का इंतजार
बीकानेर की अर्चना थानवी और उमेश थानवी ने बताया कि उनके दोनों बच्चे विदेश में रहते हैं। कोरोना के चलते पिछली बार भी घर नहीं आ सके और इस बार भी नहीं सके। अब बच्चों की याद आने लगी है। उनका चेहरा देखने के लिए फिलहाल मोबाइल ही सहारा बचा है। समय के चलते बेटे और पोते से बात करने के लिए रात को 9 बजने का इंतजार रहता है। नौ बजते ही वीडियो कॉल से उनके हाल जानते हैं।
अब घर की आ रही याद
&पिछले साल भी अपने घर नहीं आ सका और इस बार भी नहीं आया। अभी भी आना संभव नहीं है। अब बीकानेर में रह रहे मम्मी-पापा की बहुत याद रही। फिलहाल एक ही सहारा वीडियो कॉल का है।
कुणाल, शिकागो (अमरीका)
वीडियो कॉल से बात
&बेटा-बहु दोनों ही ऑस्ट्रेलिया में रहते हैं। दोनों ही आ नहीं पाए। इस साल भी घर नहीं आए। दोनों की काफी याद आती है। दोनों के हाल जानने के लिए वीडियो कॉल करते हैं और उनके काम व तबीयत के बार में पूछते हैं।
रानी रूपेला, केड़ी रूपेला
दो साल से नहीं आए घर
&कोरोना के चलते पिछले दो साल से अपने देश नहीं आ सके है। अब अपनों से बात करने का बस एक ही साधन बचा है। फिलहाल अभी फ्लाइट भी नहीं मिल पा रही है, ऐसे में आना अभी संभव नहीं है।
श्रीधर स्वामी, ऑस्ट्रेलिया