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सायरा से शादी के 16 साल बाद अस्मा रहमान से धोखे से हुआ था निकाह, लेकिन असलियत कुछ और ही थी

दिलीप कुमार की दूसरी शादी किसी हादसे की तरह थी। जो महज 2 साल चली। 1981 में जुड़ा यह रिश्ता 1983 में खत्म हुआ। हालांकि इसमें चलने जैसा कुछ था नहीं लेकिन दिलीप कुमार को बाकायदा तलाक लेकर मामला ख़त्म करना पड़ा। लोगों ने तो यहां तक कह दिया था कि दिलीप कुमार ने औलाद की चाहत में यह कदम उठाया था, लेकिन इसके पीछे की कहानी कुछ और है।

ऑटोबायोग्राफी में किया है इस गलती का जिक्र
दिलीप कुमार ने अपनी ऑटोबायोग्राफी में इस शादी का जिक्र किया था। उन्होंने लिखा था- खैर, मेरे जीवन की एक घटना जिसे मैं भूलना चाहता हूं और जिसे हमने, वास्तव में हमेशा के लिए गुमनामी में धकेल दिया है, वह एक गंभीर गलती है जो मैंने अस्मा रहमान नाम की एक महिला के साथ जुड़ने के दबाव में की थी, जिनसे मैं हैदराबाद (आंध्र प्रदेश) में एक क्रिकेट मैच में मिला था। वहां वह अपने पति के साथ रहती थी।

  • जब वह एक प्रशंसक के रूप में मुझसे मिली थी तब वह तीन बच्चों की मां थी और वह कई अन्य प्रशंसकों की तरह लग रही थी, जिन्हें मेरी बहनों फौजिया और सईदा ने पब्लिक प्लेस पर मुझसे मिलवाया था। वह मेरी बहनों की दोस्त थी। मेरी बहनों से अक्सर महिलाएं मुझसे मिलवाने और हल्की-फुल्की बातचीत करवाने की रिक्वेस्ट करती थीं। मुझे इस तरह के परिचय की आदत थी। मैं हमेशा उन मेल फैंस से गर्मजोशी से पेश आता था जिन्हें मेरे भाइयों ने घर पर बुलाया होता या जिन युवतियों को मेरी बहनें साथ लाती थीं।
  • हालांकि अस्मा के मामले में, मैं उस मिली-भगत से पूरी तरह से अनजान था जिसे धोखे से मेरे साथ किया जा रहा था और मुझसे कमिटमेंट लेने एक ऐसी स्थिति बनाई जा रही थी जिसमें निहित स्वार्थ हासिल किए जा सकें। एक बार नहीं, बल्कि कई बार मुझे वह महिला और उसका पति मिला। यहां तक ​​कि जब मैं बंबई से बाहर अलग-अलग जगहों पर था तो मेरे पास आकर रुका भी करते थे।
दिलीप कुमार कि दूसरी पत्नी अस्मा रहमान फ़िलहाल ये कहां है कोई नहीं जानता।

दिलीप कुमार कि दूसरी पत्नी अस्मा रहमान फ़िलहाल ये कहां है कोई नहीं जानता।

  • हैरानी की बात थी कि वे मेरे ट्रेवल प्लान्स और इवेंट्स से वाकिफ होते थे। 1982 में, जब यह खबर फैली कि मैंने अस्मा से शादी कर ली है और सायरा ने एक अखबार में सनसनीखेज ‘रहस्योद्घाटन’ पढ़ा, तो मेरे लिए उसे सांत्वना देना बहुत दर्दनाक था क्योंकि उसने मुझ पर भरोसा किया था और मुझे बिना शर्त प्यार किया था। जब सायरा ने खबर पढ़ी तो मैं घर पर नहीं था और सच कहूं, तो न तो उसने और न ही उसकी मां (नसीम आपा) ने जो कुछ पढ़ा उस पर विश्वास नहीं किया, क्योंकि उन्हें मेरे निकाह के समय किए गए कमिटमेंट पर विश्वास था। सायरा ने कहा कि दूसरी शादी का तो सवाल ही नहीं था और ना ही इस पर बात होनी चाहिए।
  • मैंने सायरा को जो चोट पहुंचाई, उसके मुझ पर अटूट विश्वास के टूटने के लिए मैं खुद को कभी माफ नहीं कर सकता न ही उसे भूल सकता हूं। यह जरूर कहूंगा कि उस स्थिति में भी जब एक स्वाभिमानी महिला पुरुष से नफरत करने लगती जिसने उसे अपमानित किया है, मेरी पत्नी सायरा मेरे साथ खड़ी रही। जब मैंने गंभीर गलती स्वीकार की और उससे कहा कि कानून के रस्ते सोलह साल की हमारी शादी की पवित्रता को कायम रखने दें। मैंने सायरा से अनुरोध किया कि मुझे सब कुछ सुलझाने के लिए कुछ समय दें।
  • सायरा, नसीम आपा और उसके भाई सुल्तान अहमद की सलाह पर मेरे साथ मजबूती से खड़ी रही। तलाक की कानूनी प्रक्रिया शुरू होने और आसमा के साथ मुक़दमा पूरा होने से बहुत पहले एक कमिटमेंट लेटर पर साइन करके आपाजी, सुल्तान और सायरा को दिया ताकि अपने वादे में विश्वास को मजबूत कर सकूं। मेरे कुछ करीबी दोस्तों ने गवाह के रूप में हस्ताक्षर किए। मैं एक ऐसी स्थिति का शिकार हो गया था जो सायरा के साथ मेरी शादी में एक गहरा संकट पैदा करने वाली थी। इस घटना ने हमारी निकटता और एक दूसरे पर हमारी भावनात्मक निर्भरता को मजबूत किया।

सायरा ने कहा था – मैं दूसरी पत्नी नहीं बनूंगी
इस घटना का जिक्र करते हुए सायरा ने कहा था कि- मैंने उनसे कहा था कि मैं दूसरी पत्नी नहीं बनूंगी। मुझे इकलौती पत्नी बनना था जिसका मुझसे वादा हमारी शादी की शुरुआत में किया गया था। भले ही हम दोनों मुसलमान हैं, हमने स्पष्ट रूप से एक-दूसरे से वादा किया था कि हमारे जीवन में कोई दूसरा व्यक्ति नहीं होगा; न उनके लिए और न ही मेरे लिए।

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