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सीखने से आती है साहित्य की समझ:रामस्वरूप उपाध्याय बोले -लेखन साधना का परिणाम

श्रीगंगानगर. लेखक रामकिशोर उपाध्याय ने कहा है कि लेखन निरंतर साधना का परिणाम है। जो व्यक्ति लगातार सीखता है, वही साहित्य में आगे बढ़ सकता है। वे रविवार को शहर के जवाहरनगर में एक प्राइवेट स्कूल में सृजन सेवा संस्थान के कार्यक्रम ‘ लेखक से मिलिए ‘ के दौरान संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि साहित्य विधा में शुरुआत से अंत तक व्यक्ति हर दिन सीखता है। उसे नई जानकारियां मिलती हैं।

रामकिशोर ने अपनी साहित्यिक यात्रा के बारे में कहा कि उन्होंने साहित्यिक पत्र-पत्रिकाओं से शुरुआत की। रेलवे की नौकरी के साथ लेखन काे समय दिया और जब कुछ पत्र पत्रिकाओं ने उनके लेखन को महत्व दिया तो लगा कि इस विधा में कुछ किया जा सकता है। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए लॉयन्स क्लब के नरेंद्र चांगिया ने कहा कि सृजन का यह प्रयास निश्चित रूप से सराहना के लायक है। इसके जरिए लोगों को साहित्य से जुड़े लोगों से मिलने का मौका मिलता है। विशिष्ट अतिथि श्री गुरुनानक गर्ल्स कॉलेज के वाइस प्रिंसिपल डॉ.हरीश कटारिया ने आयोजन काे बेहतरीन बताया। उन्होंने वर्तमान समय में टाइम मैनेजमेंट का महत्व बताते हुए कहा कि इसी से व्यक्ति सफलता की तरफ बढ़ता है। कार्यक्रम में सृजन के अध्यक्ष डॉ.अरुण शहैरिया, कवि संदेश त्यागी सहित कई लोग मौजूद रहे।